Friday, September 3, 2021

सरदेसाई चिल्लाए.. चंद्रा.. सुन इसे 'मिल रीफ' फेंक और जॉन एडरिच के समझने से पहले उड़ गई गिल्लियां

लंदन भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज का चौथा मैच लंदन के ओवल में खेला जा रहा है। इस मैदान से भारत की एक बहुत बड़ी सुखद याद जुड़ी है। 1971 में भारत ने ओवल पर पहला मैच और सीरीज जीती थी। भारत की जीत कहानी भी बड़ी रोचक है। टीम का हौसला बढ़ाने के लिए भारतीय फैंस चिड़ियाघर से बेला नाम की एक हथिनी लेकर आए थे। 1971 की टीम ने इसे अपनी लकी माना क्योंकि यह गणेश पूजा से जुड़ा हुआ था। लेकिन एक दूसरे तरह के जानवर का मैच पर ज्यादा असर पड़ा। पूर्व भारतीय लेग स्पिनर भागवत चंद्रशेखर ने मैच के बारे में रोचक किस्सा सुनाया। चंद्रशेखर ने अपनी पोलियोग्रस्त बांह से कमाल की फिरकी घुमाई और 38 रन देकर छह विकेट लिए। दूसरी पारी में उनके कमाल ने भारत के सामने चौथी पारी में 173 रन का लक्ष्य रखा। भारत ने चार विकेट बाकी रहते इसे हासिल कर लिया था। चंद्रा ने उस दिन को याद करते कहते हैं, 'मैं रन-अप के लिए जा रहा था तभी दिलीप सरदेसाई ने चिल्लाए, 'हे चंद्रा, इसे 'मिल रीफ' फेंको।'' चंद्राशेखर ने बुधवार को ताज सेंट जेम्स कोर्ट होटल में इस जीत की स्वर्ण जयंती के मौके पर एक वीडियो संदेश में इस मिल रीफ की कहानी बताई। उन्होंने कहा, इंग्लैंड में उस समय एक घोड़ा था मिल रीफ। वह सभी बड़ी रेस जीत रहे थे। इसमें 1971 की एपसम डर्बी भी शामिल थी। उसकी रफ्तार कमाल की थी।' चंद्रा की तेज गेंद भी बहुत बढ़िया होती थी उनके करियर के 58 टेस्ट मैचों में 242 लिए थे। उन्होंने कहा, 'मैं जॉन एड्रिच को गूगली फेंकने के बारे में सोच रहा था लेकिन मैने सोचा, 'दिलीप सरदेसाई को खेल की अच्छी समझ है।'' चंद्रशेखर ने एड्रिच, जो इंग्लैंड के चोटी के बल्लेबाज थे को शून्य पर आउट किया। 76 वर्षीय इस पूर्व खिलाड़ी ने खुशी जताते हुए ने कहा, 'जब तक वह अपना बल्ला उठा पाते गेंद विकेटों से टकरा गई थी।' फारुख इंजीनियर उस समय भारतीय टीम के विकेटकीपर थे। उन्हें चंद्रशेखर की क्षमता पर पूरा यकीन था। उन्होंने कहा, 'सभी के सम्मान के साथ मैं यह कहना चाहता हूं कि चंद्रशेखर भारत के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ स्पिनर हैं।' फारुख ने चंद्रा, इरापल्ली प्रसन्ना, बिशन सिंह बेदी और वेंकटराघवन जैसे बोलर्स के सामने जबर्दस्त विकेटकीपिंग की। उन्होंने लंदन में एक भारतीय क्रिकेट पत्रकार से कहा, 'आधे समय उन्हें पता ही नहीं होता था कि गेंद कहां जा रही है।' फारुख ने कहा, 'चंद्रा बहुत समझदार बोलर थे। वह पोलियो से पीड़ित थे लेकिन कमाल की बात है कि उन्होंने अपनी कमजोरी को ही सबसे बड़ी ताकत बना लिया।' इंजीनियर 28 रन बनाकर नाबाद थे जब दूसरे छोर पर आबिद अली ने विजयी रन बनाया। हालांकि उन्हें अपनी जीत का जश्न मनाने का समय नहीं मिला क्योंकि अगले दिन वह इंग्लिश काउंटी लंकाशर के लिए खेल रहे थे।


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