Tuesday, August 31, 2021

India vs England: क्यों विराट कोहली के हाथों में है भारत की कायमाबी की चाभी

नई दिल्ली भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज के चौथे मैच से पहले काफी हलचल मची है। और क्या इस सबके बीच भारतीय टीम अपने लिए कोई मौका तलाश सकती है। सीरीज के नतीजे के लिहाज से यह मैच काफी अहम होने वाला है। भारतीय टीम का प्रदर्शन कैसा रहेगा यह काफी हद तक उसके करिश्माई कप्तान पर भी निर्भर करेगा। अन्य प्रभावशाली कप्तानों की तरह कोहली ने भी इस टीम को एक लड़ने वाली और रिसोर्सफुल टीम बनाया है। लेकिन, बेशक ऐसा वक्त आता है जब बंधे-बधाए नियम, फॉर्म्युला, टिप्स और स्वभान काम नहीं करते। कोहली के लिए यह समय वही है। क्रिकेट की दुनिया में कहा जाता है कि बल्ले से निकले रनों का असर कप्तानी पर नजर आता है। उसमें निखार आता है। तो यह भी स्वाभाविक है कि कोहली के चरित्र की अहम खूबियां- आत्मविश्वास, स्वैग, संसाधनपूर्णता, मुश्किल वक्त में टीम को अपनी ऊर्जा से प्रेरित करना- इस सबका संतुलन तभी तक बना रहेगा जब तक वह रन बना रहे हैं। और अब कोहली का बल्ला उनसे रूठा हुआ है। ऐसा कोहली के परंपरागत रूप से फॉर्म से बाहर न होने के बावजूद ऐसा हुआ है। कोहली ने लीड्स टेस्ट के बाद कहा था कि टीम प्रबंधन व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर चयन नहीं करेगा बल्कि उसका पूरा ध्यान सिर्फ टीम पर है। लेकिन लगता है कि इसके उलट ्पनी बल्लेबाजी को लेकर कोहली जरूर विचार करना चाहेंगे। वह ड्राइंग बोर्ड पर जाकर देखेंगे कि कहां चूक हो रही है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। 2014 में इंग्लैंड सीरीज में असफल होने के बाद भी उन्होंने ऐसा ही किया था। कोहली के लिए यह आसान नहीं होगा क्योंकि हर एक्सपर्ट ने उनकी तकनीक में एक या दो कमी निकाल ली है। 'कोहली के कंधों के संतुलन से लेकर उनके बैकफुट की पोजिशन से लेकर उनके शॉट सिलेक्शन और क्रीज से बाहर खड़े होने' तक सभी को जिम्मेदार ठहराया गया है। कोहली को फ्रंटफुट पर आने की आदत है और इस वजह से अंदर आती गेंदों ने उन्हें परेशान किया है। कोहली इंग्लैंड में लगातार बल्ले का बाहरी किनारा लगने पर विकेट के पीछे लपके जा रहे हैं। गेंद गुड लेंथ पर टप्पा खा रही है और भारतीय कप्तान उस पर संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि रनों का यह सूखा इंग्लैंड सीरीज से ही शुरू हुआ है। 81 टेस्ट मैच बाद कोहली का करियर औसत 55.10 का रहा है। अक्टूबर 2019 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 254 रन बनाए थे। तब से खेले गए 14 टेस्ट मैचों में उनका औसत 28.04 का ही रहा है। बांग्लादेश के खिलाफ अपने आखिरी टेस्ट शतक के बाद उन्होंने 11 टेस्ट मैचों में उन्होंने 24.68 के औसत से रन बनाए हैं। उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डंस में सेंचुरी लगाई थी। कोहली रन बनाने की गति को भी बनाए रखते हैं। 81 मैचों के बाद उनका उनका स्ट्राइक रेट 57.63 का है। वहीं बीते 11 टेस्ट मैचों में यह कम होकर 42.90 का है। बीती 19 टेस्ट पारियों में उन्होंने कोई शतक नहीं लगाया है। यह सुखद संकेत है कि कोहली ने आठ टेस्ट पारियों के बाद हाफ सेंचुरी लगाई। हालांकि, इस हाफ सेंचुरी में कोहली कहीं से भी अपने पुराने रंग में नहीं दिखे। कोहली का मुश्किल दौर चल रहा है लेकिन महान बल्लेबाज जानते हैं कि ऐसा वक्त आता-जाता रहता है। शुरुआत में कोहली को अपनी तय धारणाओं से हटना होगा। कई बार आगे बढ़ने के लिए आपको पीछे हटना पड़ता है। कोहली के लिए भी शायद यह तरकीब काम कर जाए।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3jy1yBt

हैरान हूं लोग पूछ रहे हैं कि क्या ईशांत ने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेल लिया: आशीष नेहरा

नई दिल्ली का लीड्स टेस्ट में प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा था। इसके लिए उनकी काफी आलोचनाएं हुईं। हालांकि टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा इस बात से हैरान हैं। उन्होंने कहा वह सिर्फ एक मैच में खराब प्रदर्शन के बाद शर्मा की आलोचना से काफी हैरान हैं। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच में ईशांत कोई विकेट हासिल नहीं कर पाए थे। इंग्लैंड ने लीड्स में भारत को पारी और 76 रन से हराकर सीरीज में बराबरी कर ली है। ईशांत शर्मा ने 22 ओवर गेंदबाजी की और 4.18 के औसत से 92 रन दिए। हेडिंग्ले में भारत के पांच तेज गेंदबाजों में ईशांत का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। हालांकि कप्तान विराट कोहली और तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी का कहना है कि ईशांत की फिटनेस के साथ कोई समस्या नहीं है। हालांकि ईशांत ने कई नो-बॉल फेंकी जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। नेहरा हालांकि इस बात को लेकर काफी हैरान थे कि आखिर लोग ईशांत की आलोचना क्यों कर रहे हैं। उन्होंने भारत में आधिकारिक प्रसारणकर्ता सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के एक कार्यक्रम में कहा, 'यह ईशांत शर्मा के साथ अन्याय होगा अगर हम सिर्फ एक टेस्ट मैच के आधार पर उनका आकलन करें या टीम में उनकी जगह को लेकर चर्चा करना शुरू कर दें। किसी ने कल मुझसे पूछा, क्या हेडिंग्ले ईशांत का आखिरी टेस्ट मैच होगा? मैं इस बात से काफी हैरान था कि किसी ने मुझसे यह सवाल पूछा।' भारत के लिए 17 टेस्ट, 120 वनडे इंटरनैशनल और 27 टी20 इंटरनैशनल मैच खेलने वाले नेहरा ने आगे कहा कि सिर्फ एक मैच के आधार पर टीम में ईशांत की जगह पर सवाल नहीं उठना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आप ईशांत शर्मा जैसे गेंदबाज को सिर्फ एक मैच के प्रदर्शन के आधार पर नहीं परख सकते। हां, हमारे पास चार-पांच गेंदबाज हैं और उनके बीच कड़ा मुकाबला है। लेकिन आप हर टेस्ट मैच में अलग गेंदबाज के साथ नहीं उतर सकते।' उन्होंने आगे कहा कि भारत हेडिंग्ले टेस्ट में ईशांत शर्मा की वजह से नहीं हारा। नेहरा ने माना कि हेडिंग्ले टेस्ट में ईशांत का प्रदर्शन अच्छा नहीं था लेकिन यह भी कहा कि ईशांत के अनुभव वाला खिलाड़ी किसी भी समय मैच का रुख बदल सकता है। नेहरा ने कहा, 'ईशांत ने यहां नो-बॉल फेंकी और जसप्रीत बुमराह और रविंद्र जडेजा ने भी ऐसा किया। हां, मेरे हिसाब से ईशांत शर्मा अच्छी लय में नहीं थे। हम मैच हार गए इस वजह से इस पर ज्यादा चर्चा हो रही है। ईशांत हमारी हार का कारण नहीं थे। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह पहला मैच चोट के कारण नहीं खेल पाए थे। लेकिन वह 100 से अधिक टेस्ट मैच खेल चुके हैं और इस वजह से उन्होंने दूसरे टेस्ट में जल्दी ही टेस्ट में जल्दी ही वापसी कर ली।' जब नेहरा से पूछा गया कि क्या ईशांत को चौथे टेस्ट में आराम दिया जाएगा। नेहरा ने कहा कि चौथे टेस्ट में ऑफ स्पिनर अश्विन को जगह मिल सकती है ऐसे में मोहम्मद सिराज या ईशांत को बाहर किया जा सकता है।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3gMJzWc

देखें वीडियो- अंपायर ने नहीं दी वाइड, दूर जाकर खड़े हो गए नाराज कायरन पोलार्ड

सेंट कीट्स ऐंड नीव्स त्रिनबागो नाइट राइडर्स के कप्तान कायरन पोलार्ड सिर्फ अपने खेल से ही नहीं बल्कि अपने व्यवहार से भी सुर्खियां बटोरते रहते हैं। उन्होंने ऐसा ही कुछ कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) में सेंट लूसिया के खिलाफ मुकाबले के दौरान किया यह उस पारी का 19वां ओवर था। वहाब रियाज गेंदबाजी कर रहे थे। वहाब का यह ओवर 10 गेंद तक चला। न्यूजीलैंड के बल्लेबाज टिम सीफर्ट ने एक ऐसी गेंद खेली जो ऑफ स्टंप की वाइड लाइन से बाहर थी। कीवी विकेटकीपर बल्लेबाज ने इसे खेलने की पूरी कोशिश की लेकिन गेंद वाकई बहुत दूर थी। बल्लेबाज और पोलार्ड उस समय हैरान रह गए जब मैदानी अंपायर ने इस गेंद को सही माना और वाइड नहीं दिया। हालांकि सीफर्ट ने गेंद फेंके जाने से पहले ऑफ स्टंप के बाहर मूव भी नहीं किया था। वहाब रियाज इससे पिछले ओवर में चार वाइड फेंक चुके थे। अंपायर से इस फैसले पर बहस करने के बजाय, पोलार्ड ने थोड़ी सी बात की और चुपचाप रहकर अपना विरोध जताने का फैसला किया। वह शॉर्ट मिडविकेट की ओर 20 गज जाकर खड़े हो गए। पोलार्ड 30 गज के घेरे के काफी करीब पहुंच गए। वह आखिरी गेंद के लिए क्रीज के समांनतर खड़े रहे। पोलार्ड ने टीम को दिलाई जीत त्रिनबागो नाइट राइडर्स चार मैच खेलने वाली पहली टीम बन गई है। पिछले सीजन में त्रिनबागो की टीम ने पिछले सीजन में कोई मैच नहीं हारा था। हालांकि इस सीजन में चार में से दो मुकाबलों में इस टीम को हार का सामना करना पड़ा है। मैच की बात करें तो सेंट लूसिया की टीम ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया। कायरन पोलार्ड और टिम सीफर्ट की जोड़ी ने पांचवें विकेट के लिए 78 रन की साझेदारी कर अपनी टीम को 7 विकेट पर 158 रन तक पहुंचाया। 159 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट लूसिया की टीम बीच के ओवरों में पटरी से उतर गई। आंद्रे फ्लेचर अकेले लड़ते नजर आए। उन्होंने नाबाद 81 रन बनाए। आखिर त्रिनबागो की टीम ने 27 रन से मैच जीता।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3BtJfmT

ओवल टेस्ट से पहले भारतीय कप्तान विराट कोहली के सामने हैं चार अहम सवाल

लीड्स में टीम इंडिया की हार के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या विराट कोहली ऐंड कंपनी इंग्लैंड में सही टीम कॉम्बिनेशन के साथ खेल रही है। चोट और हार के बाद मेहमान टीम को अपने प्लेइंग इलेवन में मजबूरी में ही सही बदलाव करने पड़ सकते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कप्तान कोहली मिडल-ऑर्डर में भी बदलाव करेंगे? या एक बार फिर चार-पेसर की थिअरी पर जाएंगे और बल्लेबाजी को नहीं छेड़ा जाएगा? एक नजर डालते हैं

भारतीय टीम का लीड्स में प्रदर्शन देखने के बाद कई सवाल सामने आए। टीम के खिलाड़ियों के प्रदर्शन से लेकर खिलाड़ियों की टीम में जगह को लेकर। भारतीय कप्तान को गुरुवार को मैदान पर उतरने से पहले कई सवालों के जवाब तलाशने होंगे।


ओवल टेस्ट से पहले भारतीय कप्तान विराट कोहली के सामने हैं चार अहम सवाल

लीड्स में टीम इंडिया की हार के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या विराट कोहली ऐंड कंपनी इंग्लैंड में सही टीम कॉम्बिनेशन के साथ खेल रही है। चोट और हार के बाद मेहमान टीम को अपने प्लेइंग इलेवन में मजबूरी में ही सही बदलाव करने पड़ सकते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कप्तान कोहली मिडल-ऑर्डर में भी बदलाव करेंगे? या एक बार फिर चार-पेसर की थिअरी पर जाएंगे और बल्लेबाजी को नहीं छेड़ा जाएगा? एक नजर डालते हैं



रहाणे पर नजर
रहाणे पर नजर

अजिंक्य रहाणे का हालिया फॉर्म बहुत अच्छा नहीं है। वह टीम के उपकप्तान हैं। और इस लॉजिक के हिसाब से टीम में उनका स्थान सुनिश्चित होना चाहिए। और खास तौर पर लॉर्ड्स टेस्ट, जिसमें भारत ने जीत हासिल की, में लगाई गई हाफ सेंचुरी के बाद यह माना जा रहा था कि रहाणे अब रंग में लौट आए हैं। लेकिन रहाणे पर कई सवाल हैं। खास तौर पर तब जब सूर्यकुमार यादव और हनुमा विहारी जैसे खिलाड़ी अभी बैंच पर बैठे हैं। इस बात में कोई शक नहीं कि रहाणे को अपने प्रदर्शन में और निरंतरता लानी होगी। उन्होंने इस सीरीज में 5, 1, 61, 18 और 10 रन की पारियां खेली हैं।



ईशांत का क्या होगा, एक तेज गेंदबाज को मिलेगा आराम?
ईशांत का क्या होगा, एक तेज गेंदबाज को मिलेगा आराम?

ईशांत शर्मा लीड्स में बिलकुल भी रंग में नजर नहीं आए। कप्तान विराट कोहली ने हालांकि ईशांत की चोट को लेकर की बात से इनकार किया लेकिन फिर भी इस तेज गेंदबाज को लेकर टीम में सवाल हैं। अगर ईशांत को टीम में शामिल नहीं किया जाता है तो शार्दुल ठाकुर, जो चोट से पहले नॉटिंगम टेस्ट में खेले थे, को मौका मिल सकता है। उनकी बल्लेबाजी भी इसमें मदद करती है। अगर शार्दुल पूरी तरह फिट नहीं हैं तो भारत के पास उमेश यादव के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। हालांकि यादव को हालिया वक्त में ज्यादा मौके नहीं मिले हैं। भारत ने इस दौरे पर एक अच्छे स्विंग गेंदबाज को मिस किया है। कोहली ने तेज गेंदबाजों को आराम देते हुए मौके देने की बात कही है। हालांकि उन्हें इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि सिराज, शमी और बुमराह की तिकड़ी को तोड़ना न पड़े।



क्या होगा अग्रवाल और साव का
क्या होगा अग्रवाल और साव का

इन दोनों को मौका मिलने की संभावना कम है। चेतेश्वर पुजारा ने लीड्स में 91 रन बनाकर अपनी जगह बचा ली है। और अग्रवाल और साव को मौका देना चाहते हैं कि इसका अर्थ है कि केएल राहुल की जगह को फिर बदलना होगा। यह उनके साथ ठीक नहीं होगा क्योंकि उन्होंने रोहित शर्मा के साथ मिलकर टीम को ज्यादातर मौकों पर अच्छी शुरुआत दी है। हालांकि एक संभावना बन सकती है। अगर पंत की बल्ले से खराब फॉर्म को देखा जाए तो कप्तान एक गेंदबाज को कम करके अतिरिक्त बल्लेबाज को मौका दे सकता है। हालांकि कोहली के लिए टेस्ट मैच में 20 विकेट लेने काफी अहम हैं। ऐसे में यह होना जरा मुश्किल है।



अश्विन को मौका, जडेजा बाहर?
अश्विन को मौका, जडेजा बाहर?

यह इतना सीधा सवाल नहीं है। रविंद्र जडेजा के घुटने में चोट है और इस वजह से अश्विन को टीम में मौका मिल सकता है। हालांकि, अगर वह मैदान जो परंपरागत रूप से स्पिनर्स के लिए फायदेमंद है, वहां भारतीय टीम एक हैरान करने वाला फैसला कर सकती है। अश्विन और जडेजा, दोनों के साथ मैदान पर उतरा जा सकता है। इसके साथ तीन गेंदबाजों को मौका मिल सकता है। इससे ऋषभ पंत को बल्लेबाजी में भी सहयोग मिलेगा। लेकिन कहीं न कहीं इससे विराट कोहली की चार तेज गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरने की थिअरी को नुकसान पहुंचता है। मौसम और परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।





from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/2WzrZhz

पैरा शूटर सिंहराज अधाना को ढाई करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी देगी हरियाणा सरकार

चंडीगढ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने तोक्यो पैरालिंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले निशानेबाज सिंहराज अधाना को ढाई करोड़ रुपये नकद पुरस्कार और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधाना ने हरियाणा और पूरे देश के लोगों के दिल जीते हैं। उन्होंने एक बयान में अधाना को बधाई दी और उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामना भी दी। पोलियो के शिकार अधाना ने पहली बार पैरालिंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच वन स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। पहली बार पैरालिंपिक में भाग ले रहे 39 वर्षीय सिंहराज ने कुल 216.8 अंक बनाकर तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने छठे स्थान पर रहकर आठ निशानेबाजों के फाइनल में जगह बनाई थी। भारत का यह तोक्यो पैरालिंपिक में निशानेबाजी में दूसरा पदक है। सोमवार को अवनि लेखरा ने आर-2 महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। भारत की तोक्यो पैरालिंपिक में पदकों की संख्या 10 पहुंच गई है। सिंहराज शीर्ष तीन में जगह बनाने के लिए शुरू से ही संघर्षरत थे। उनका 19वां शॉट सही नहीं लगा जिससे वह पिछड़ गए थे लेकिन उनका 20वां प्रयास अच्छा रहा जबकि इसमें चीन के झियालोंग लोउ 8.6 अंक ही बना पाए। हरियाणा के बहादुरगढ़ के रहने वाले सिंहराज केवल चार साल पहले इस खेल से जुड़े। वह फरीदाबाद के सैनिक स्कूल के चेयरमैन भी रह चुके हैं। उनके दादाजी देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे तथा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना में कार्यरत थे। सिंहराज ने यूएई के अल अईन में 2021 पैरा खेल विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतकर पैरालिंपिक में जगह बनाई थी।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3BHzhyH

देश के अलग अलग हिस्सों से निकल रहे चैंपियन खिलाड़ियों से खुश हैं PM, बताया शुभ संकेत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर खुशी जताई है कि ओलिंपिक और पैरालिंपिक में भारत के पदक विजेता देश के अलग अलग हिस्सों से हैं। पीएम ने इसे शुभ संकेत बताया। सूत्रों ने बताया कि मोदी ने तोक्यो पैरालिंपिक में रजत और कांस्य पदक जीतने वाले मरियप्पन थंगावेलु और शरद कुमार को बधाई देने के लिए फोन पर उनसे बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। तोक्यो पैरालिंपिक में भारत ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए अब तक 10 पदक जीत लिए हैं। दी ने दोनों खिलाड़ियों से कहा कि ये पदक उनकी लगातार कड़ी मेहनत का नतीजा है। कुमार ने प्रधानमंत्री से कहा कि वह उनसे प्रेरणा लेते हैं और पैरा एथलीटों की जिस तरह से वह विशेष तौर पर हौसलाअफजाई कर रहे हैं, वह बहुत अच्छा संकेत है। उन्होंने बताया कि जब वह उक्रेन में अभ्यास कर रहे थे तो प्रधानमंत्री अक्सर उनकी कुशलक्षेम पूछते थे। शरद के पदक जीतने के बाद मोदी ने ट्वीट किया था , 'आसानी से हार नहीं मानने वाले शरद कुमार ने कांस्य पदक जीतकर हर भारतीय के चेहरे पर मुस्कान लाई है। उनकी जीवनयात्रा से कइयों को प्रेरणा मिलेगी। उन्हें बधाई ।' एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा , 'नई ऊंचाइयों को छूते जा रहे मरियप्पन थंगावेलु निरंतरता और उत्कृष्टता के परिचायक हैं। उन्हें रजत पदक जीतने पर बधाई। भारत को उनकी उपलब्धि पर गर्व है।' मोदी ने इससे पहले दिन में सिंहराज अधाना से बात करके पैरालिंपिक में कांस्य पदक जीतने पर उन्हें बधाई दी थी।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3yugzIB

फाइनल से पहले रात भर रोते रहे शरद कुमार, पिता के कहने पर भगवद् गीता पढ़ी और....

तोक्यो भारतीय कुमार तोक्यो पैरालिंपिक टी42 ऊंची कूद फाइनल से अपना नाम वापस लेने की सोच रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि वह अभ्यास के दौरान चोटिल हो गए थे। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भगवद् गीता ने उनका साथ दिया और वह ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहे। फाइनल से एक रात पहले शरद ने अपनी चोट को लेकर भारत में परिवार से बात की। पटना में जन्में 29 वर्ष के शरद को सोमवार को घुटने में चोट लगी थी। शरद ने कहा कि उनके लिए यह मेडल सोने पर सुहागा की तरह है। शरद ने कहा, 'कांस्य पदक जीतकर अच्छा लग रहा है क्योंकि मुझे सोमवार को अभ्यास के दौरान चोट लगी थी। मैं पूरी रात रोता रहा और नाम वापस लेने की सोच रहा था। मैंने कल रात अपने परिवार से बात की। मेरे पिता ने मुझे भगवद गीता पढ़ने को कहा और यह भी कहा कि जो मैं कर सकता हूं , उस पर ध्यान केंद्रित करूं न कि उस पर जो मेरे वश में नहीं है।' दो वर्ष की उम्र में पोलियो की नकली खुराक दिए जाने से शरद के बायें पैर में लकवा मार गया था। उन्होंने कहा , 'मैंने चोट को भुलाकर हर कूद को जंग की तरह लिया। पदक सोने पे सुहागा रहा।' दिल्ली के मॉडर्न स्कूल और किरोड़ीमल कॉलेज से से तालीम लेने वाले शरद ने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर्स डिग्री ली है । दो बार एशियाई पैरा खेलों में चैंपियन और विश्व चैम्पियनशिप के रजत पदक विजेता शरद ने कहा , 'बारिश में कूद लगाना काफी मुश्किल था। हम एक ही पैर पर संतुलन बना सकते हैं और दूसरे में स्पाइक्स पहनते हैं। मैं अधिकारियों से बात करने की कोशिश की कि स्पर्धा स्थगित की जानी चाहिए लेकिन अमेरिकी ने दोनों पैरों में स्पाइक्स पहने थे। इसलिए स्पर्धा पूरी कराई गई।'


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3tf2XAd

तालिबानियों के सपॉर्ट में उतरे अफरीदी, पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा- इन्हें तो तालिबान का PM होना चाहिए

नई दिल्ली पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी (Shahid Afridi) का विवादों से पुराना नाता रहा है। या यूं कहें कि अफरीदी खबरों में बने रहने के लिए आए दिन विवादित बयान देते रहते हैं। इस समय अफरीदी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दरअसल यह वीडियो पाकिस्तानी (Naila Inayat) ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर अपलोड किया है। नाइला ने वीडियो के साथ लिखा, ' शाहिद अफरीदी ने कहा है कि तालिबान बहुत सकारात्म्क सोच के साथ आया है। वे महिलाओं को काम दे रहे हैं। उन्हें लगता है कि तालिबान क्रिकेट को पसंद करते हैं। ऐसे में तो उन्हें (अफरीदी) तालिबान का अगला पीएम होना चाहिए।' अफगानिस्तान में लगभग 20 साल बाद फिर से तालिबान शासन आ चुका है। अफरीदी से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी तालिबानियों के प्रति अपनी प्रेम जाहिर कर चुके हैं। अफरीदी () वीडियो में कहते हैं, 'तालिबान इस बार बड़े पॉजिटिव फ्रेम ऑफ माइंड के साथ आया है। उसने वहां की महिलाओं को काम करने और राजनीति में उतरेन की इजाजत दी है। ये चीजें पहले देखने को नहीं मिली है।' अफगानिस्‍तान में तालिबान के साथ करीब 20 साल तक चली जंग में शर्मनाक 'हार' के बाद अमेरिकी सैनिक अब अपने आखिरी गढ़ काबुल एयरपोर्ट को भी अलविदा कह चुके हैं। काबुल एयरपोर्ट से सोमवार की देर रात आखिरी अमेर‍िकी सैनिक की वापसी के बाद तालिबान आतंकियों ने जमकर जश्‍न मनाया। अफरीदी ने कहा, ' तालिबान क्रिकेट को सपॉर्ट कर रहा है। श्रीलंका के मौजूदा हालात के कारण इस बार सीरीज नहीं हुई। लेकिन तालिबान क्रिकेट को पूरा सपॉर्ट कर रहा है।' अफगानिस्तान को हाल में पाकिस्तान के खिलाफ श्रीलंका में लिमिटेड ओवर्स की सीरीज खेलनी थी लेकिन कोविड के कारण श्रीलंका में लगे लॉकडाउन की वजह से इसे स्थगित कर दिया गया।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3t3I8aQ

इंग्लैंड में क्यों है विराट कोहली का बल्ला खामोश, कप्तान जो रूट ने बताई ये वजह

लंदन भारत के खिलाफ तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड को जीत दिलाने वाले ने कहा है कि उनकी टीम ओवल पर भारत के पलटवार का सामना करने के लिए तैयार है। रूट ने कोहली के बल्ले को खामोश रखने का श्रेय अपने गेंदबाजों को दिया। चौथे टेस्ट के लिए भारतीय प्लेइंग इलेवन में विश्व स्तरीय गेंदबाज आर अश्विन को शामिल किया जा सकता है। भारत ने लॉडर्स टेस्ट जीतकर पांच मैचों की श्रृंखला में 1-0 से बढ़त बना ली थी लेकिन इंग्लैंड ने तीसरे टेस्ट में एक पारी और 76 रन से जीत दर्ज करके वापसी की। रूट ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा , 'विराट कोहली की कप्तानी में भारत जैसी विश्व स्तरीय टीम दमदार वापसी की कोशिश करेगी। ऐसे में हमें आत्ममुग्धता से बचना है। हमने अभी कुछ भी हासिल नहीं किया है। श्रृंखला में बराबरी ही की है।' कोहली ने पहले तीन टेस्ट में अश्विन की बजाय रविंद्र जडेजा को उतारा लेकिन अब ओवल टेस्ट में इस अनुभवी ऑफ स्पिनर को उतारने की मांग तेज हो रही है। रूट ने कहा , 'उनका (अश्विन) रेकॉर्ड खुद बोलता है। वह विश्व स्तरीय खिलाड़ी हैं। हमने उन्हें हमारे खिलाफ रन बनाते और विकेट लेते देखा है। हमें पता है कि टेस्ट क्रिकेट में वह क्या कर सकते हैं।' अनिल कुंबले के बाद हरभजन सिंह के साथ भारत के दूसरे सबसे कामयाब टेस्ट स्पिनर बनने से चार विकेट पीछे अश्विन ने पिछले महीने काउंटी चैम्पियनशिप में सरे के लिए खेलते हुए एक मैच में छह विकेट लिए थे। न्यूजीलैंड के खिलाफ जून में विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल में भी वह भारत के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज थे। रूट ने कहा , 'हम हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयारी करेंगे। भारत जो भी संयोजन लेकर उतरेगा, हम उसके लिए तैयार होंगे।' कोहली के बल्ले से रन नहीं निकल रहे हैं और रूट ने इसका श्रेय अपने गेंदबाजों को दिया। उन्होंने कहा , 'इसका श्रेय हमारे गेंदबाजों को जाता है कि उनके बल्ले को खामोश रखा है। श्रृंखला जीतने के लिए आगे भी ऐसा करना होगा। हमने उन्हें आउट करने का तरीका फिलहाल खोज लिया है जिससे हम भारत पर दबाव बनाने में कामयाब रहे हैं।'


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3jumRni

विनेश ने मुकाबला बीच में ही छोड़ा, बजरंग ने पत्नी संगीता का कुछ यूं बढ़ाया हौसला

नई दिल्ली फोगाट की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही है। विनेश ने कुश्ती विश्व चैम्पियनशिप के लिए ट्रायल बीच में ही छोड़ दिया जबकि उनकी चचेरी बहन संगीता (62 किलो) ने तीन साल बाद मैट पर शानदार वापसी करते हुए भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल रहीं। तोक्यो ओलिंपिक से लौटने के बाद अनुशासनात्मक कारणों से भारतीय कुश्ती महासंघ का निलंबन झेलने वाली विनेश को बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। ट्रायल में सभी की नजरें उन पर थी लेकिन वह शुरू ही से कमजोर नजर आई। भारत की सबसे कामयाब महिला पहलवान विनेश ने 55 किलोवर्ग के पहले मुकाबले में अंजू को 10-5 से हराया लेकिन वह फॉर्म में नहीं दिखीं। इसके बाद पिंकी के खिलाफ वह मैट पर उतरी ही नहीं जिससे दो से 10 अक्टूबर तक होने वाली चैम्पियनशिप में पिंकी को टीम में जगह मिली। 'मुझे चक्कर आ रहे थे' विनेश ने कहा , 'मुझे नहीं पता कि मुझे क्या हो गया है। चोट नहीं है लेकिन मुझे चक्कर आ रहे थे। मेरा शरीर पहले जैसा नहीं है। मैं डॉक्टर को दिखा रही हूं। शायद कोरोना संक्रमण का शरीर पर असर हुआ है।' विनेश ने पहले भी कहा था कि तोक्यो ओलिंपिक क्वार्टर फाइनल में उन्हें कुछ सूझ नहीं पड़ रहा था। वह मुस्कुरा रही थीं लेकिन अपनी निराशा छिपा नहीं सकीं। ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया की पत्नी संगीता घुटने के दो ऑपरेशन के बाद मैट पर उतरी और शानदार जीत दर्ज क। उन्होंने जूनियर विश्व चैम्पियनशिप रजत पदक विजेता संजू देवी को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराया और फिर मनीषा को 9-5 से मात दी। मुकाबले के दौरान बजरंग कोच कॉर्नर पर खड़े थे। साक्षी को मनीषा ने दी मात 62 किलो वर्ग में रियो ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक को मनीषा ने हरा दिया। जूनियर पहलवानों का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा। शुभम कौशिक ने सीनियर राष्ट्रीय चैम्पियन पंकज को 8-3 से हराने के बाद रेलवे के अरुण को 57 किलो ट्रायल में 8-4 से मात दी। यश तुषिर ने अमित धनकड़ को 74 किलो फाइनल में हराया। वहीं गौरव बालियान ने नरसिंह यादव को मात दी। पृथ्वीराज पाटिल ने 92 किलो और अनिरुद्ध गुलिया ने 125 किलो में क्वालीफाई किया। रविंदर दहिया (61 किलो), रोहित (65 किलो), सुशील (70 किलो), संदीप मान (86 किलो) और सत्यव्रत कादियान (97 किलो) भी जीत गए। महिला वर्ग में अंशु मलिक ने 57 किलोवर्ग में मानसी और ललिता को हराकर टीम में जगह बनाई। सरिता मोर (59 किलो) , दिव्या ककरान (72 किलो), हैनी (50 किलो), पूजा जाट (53 किलो), भटेरी (65 किलो) , रितु मलिक (68 किलो) और किरण (76 किलो) ने भी क्वालीफाई कर लिया।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3t028uT

मरियप्पन थंगावेलु ने पैरालिंपिक में लगातार दूसरा पदक जीता, शरद कुमार को ब्रॉन्ज

तोक्यो रियो ओलिंपिक के चैंपियन मरियप्पन थंगावेलु और शरद कुमार ने मंगलवार को पुरुष ऊंची कूद टी42 स्पर्धा में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीते। इसके साथ ही तोक्यो पैरालिंपिक में भारत के कुल पदकों की संख्या 10 तक पहुंच गई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने थंगावेलु और शरद कुमार को बधाई दी है। पीएम ने अपने ट्वीट में लिखा कि आप दोनों की इस उपलब्धि से युवाओं को प्ररेणा मिलेगी। मरियप्पन ने 1.86 मीटर के प्रयास के साथ रजत पदक अपने नाम किया जबकि अमेरिका के सैम ग्रेव ने अपने तीसरे प्रयास में 1.88 मीटर की कूद के साथ सोने का तमगा जीता। शरद ने 1.83 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता। 9 प्रतियोगियों में 7वें स्थान पर रहे वरुण भाटी स्पर्धा में हिस्सा ले रहे तीसरे भारत और रियो 2016 पैरालिंपिक के कांस्य पदक विजेता वरुण सिंह भाटी नौ प्रतिभागियों में सातवें स्थान पर रहे। वह 1.77 मीटर की कूद लगाने में नाकाम रहे। इन खिलाड़ियों को रखा जाता है टी42 वर्ग में टी42 वर्ग में उन खिलाड़ियों को रखा जाता है जिनके पैर में समस्या है, पैर की लंबाई में अंतर है, मांसपेशियों की ताकत और पैर की मूवमेंट में समस्या है। इस वर्ग में खिलाड़ी खड़े होकर प्रतिस्पर्धा पेश करते हैं। इससे पहले मंगलवार को निशानेबाज सिंहराज अधाना ने पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल एसएफ1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। तोक्यो पैरालिंपिक में भारत के पदकों की संख्या हुई 10 भारत ने अब तक दो स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य पदक जीते हैं। मरियप्पन ने रियो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। पैरालिंपिक में मरियप्पन का यह लगातार दूसरा पदक है। इससे पहले मंगलवार को निशानेबाज सिंहराज अडाना ने पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल एसएफ1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। भारत ने अब तक दो स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य पदक जीते हैं। रियो में पांच साल पहले स्वर्ण पदक जीतने वाले मरियप्पन तोक्यो पैरालिंपिक के उद्घाटन समारोह में भारत के ध्वजवाहक थे। थंगावेलु का5 साल की उम्र में दाहिना पैर खराब हो गया था पांच वर्ष की उम्र में बस के नीचे कुचले जाने के बाद थंगावेलु का दाहिना पैर खराब हो गया था। उनके पिता ने परिवार को छोड़ दिया जिसके बाद मां ने उन्हें अकेले पाला। उनकी मां मजदूरी करती थी और बाद में सब्जी बेचने लगीं। मरियप्पन का बचपन गरीबी और अभावों में बीता। वहीं पटना के रहने वाले कुमार को दो बरस की उम्र में पोलियो की नकली खुराक लेने के बाद बायें पैर में लकवा मार गया था। वह दो बार एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/2V30RXp

पेसर डेल स्टेन ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से लिया संन्यास

नई दिल्ली दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन (Dale Steyn retires) ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषण की है। साल 2019 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने वाले स्टेन ने अपना अंतिम इंटरनैशनल मैच फरवरी 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 के रूप में खेला था। पिछले कुछ वर्षों से स्टेन चोट की वजह से टीम से अंदर बाहर होते रहे। स्टेन ने रिटायरमेंट की घोषणा सोशल मीडिया के जरिए की। स्टेन का इंटरनैशनल करियर 17 साल का रहा। उन्होंने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर लिखा, ' आज, मैं आधिकारिक रूप से उस खेल से रिटायर हो रहा हूं जिसे मैं बहुत प्यार करता हूं। सभी को धन्यवाद, परिवार से लेकर टीम के साथियों, पत्रकारों से लेकर प्रशंसकों तक, यह एक साथ शानदार सफर रहा।' स्टेन ने संन्यास लेने की घोषणा करने वाले अपने पत्र में अमेरिका के रॉक बैंड 'काउंटिंग क्रो' के गाने का जिक्र करते हुए अपनी भावनाओं को उजागर किया। इस तेज गेंदबाज ने लिखा, 'यह ट्रेनिंग, मैच, यात्रा, जीत, हार, उपलब्धियों, थकान, खुशी और भाईचारे के 20 साल रहे। बताने के लिए काफी यादगार पल हैं। कई लोगों को धन्यवाद देना है। इसलिए इसे मैं विशेषज्ञों पर छोड़ देता हूं, मेरा पसंदीदा बैंड, काउंटिंग क्रोज।' स्टेन ने टेस्ट में 439 विकेट चटकाए 38 वर्षीय स्टेन ने दक्षिण अफ्रीका की ओर से 93 टेस्ट, 125 वनडे और 47 टी20 इंटरनैशनल मैच खेले। स्टेन के नाम 439 टेस्ट विकेट हैं वहीं वनडे में उन्होंने 196 शिकार किए। टी 20 में स्टेन ने 64 विकेट चटकाए। अपने फैंस के बीच 'स्टेन गन' के नाम से फेमस डेल स्टेन ने कई मैचों में अपनी बेहतरीन गेंदबाजी से टीम को जीत दिलाई।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3kHUwJy

IPL के 15वें एडिशन में खेलेंगी 10 टीमें, BCCI को हो सकता है 5000 करोड़ का फायदा

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 2022 के सत्र में दो नई फ्रेंचाइजी टीमों को जोड़ने से भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के खाते में जल्द ही कम से कम 5000 करोड़ रुपये जमा हो सकते हैं। आईपीएल अभी आठ टीमों के बीच खेला जाता है लेकिन अगले वर्ष से इसमें 10 टीमें खेलेंगी। आईपीएल संचालन परिषद की हाल की बैठक के दौरान इसकी बोली प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया। बीसीसीआई के एक सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, 'कोई भी कंपनी 75 करोड़ रुपये देकर बोली दस्तावेज खरीद सकती है। पहले दो नई टीमों का आधार मूल्य 1700 करोड़ रुपये रखने पर विचार किया जा रहा था लेकिन अब आधार मूल्य 2000 करोड़ रुपये करने का फैसला किया गया है।' आईपीएल के वित्तीय पक्ष को देखने वाले सूत्र ने बताया कि यदि बोली प्रक्रिया योजना के अनुसार आगे बढ़ी तो बीसीसीआई को कम से कम 5000 करोड़ रुपये का लाभ होगा क्योंकि कई कंपनियां बोली प्रक्रिया में दिलचस्पी दिखा रही हैं। उन्होंने कहा, 'बीसीसीआई कम से कम 5000 करोड़ रुपये की उम्मीद कर रहा है। अगले सत्र में आईपीएल में 74 मैच होंगे और यह सभी के लिए फायदे वाली स्थिति होगी।' पता चला है कि सालाना 3000 करोड़ रुपये या इससे अधिक का टर्न ओवर रखने वाली कंपनियों को ही बोली प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। यही नहीं बीसीसीआई कंपनियों के समूह को भी टीम खरीदने के लिए अनुमति देने की योजना बना रहा है। इससे बोली प्रक्रिया अधिक रोचक बन जाएगी। सूत्र ने कहा, 'मुझे लगता है कि तीन से अधिक कंपनियों को समूह बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, लेकिन यदि तीन कंपनियां साथ में आकर एक टीम के लिए बोली लगाना चाहती हैं तो ऐसा करने के लिए उनका स्वागत है।' नई टीमों जो आधार स्थल होंगे उनमें अहमदाबाद, लखनऊ और पुणे भी शामिल हैं। अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम और लखनऊ का इकाना स्टेडियम फ्रेंचाइजी की पसंद हो सकते हैं क्योंकि इन स्टेडियमों की क्षमता अधिक है।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3yyOlMV

सिंहराज को कांस्य, भारत को पैरालिंपिक निशानेबाजी में मिला दूसरा पदक

तोक्योभारतीय निशानेबाज सिंहराज अडाना ने पैरालिंपिक खेलों में मंगलवार को यहां पी1 पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता जो इन खेलों की निशानेबाजी प्रतियोगिता में देश का दूसरा पदक है। पोलियों से ग्रस्त होने वाले और पहली बार पैरालंपिक में भाग ले रहे 39 वर्षीय सिंहराज ने कुल 216.8 अंक बनाकर तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने छठे स्थान पर रहकर आठ निशानेबाजों के फाइनल में जगह बनाई थी। क्वॉलिफिकेशन में 575 अंक के साथ शीर्ष पर रहने वाले मनीष नरवाल हालांकि फाइनल में सातवां स्थान ही हासिल कर पाए। भारत का यह वर्तमान खेलों में निशानेबाजी में दूसरा पदक है। सोमवार को अवनि लेखरा ने आर-2 महिला 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। अडाना के इस पदक से भारत की तोक्यो पैरालिंपिक में पदकों की संख्या आठ पहुंच गई है। सिंहराज शीर्ष तीन में जगह बनाने के लिए शुरू से ही संघर्षरत थे। उनका 19वां शॉट सही नहीं लगा जिससे वह पिछड़ गए थे लेकिन उनका 20वां प्रयास अच्छा रहा जबकि इसमें चीन के झियालोंग लोउ 8.6 अंक ही बना पाए। चीन ने हालांकि फाइनल में दबदबा बनाए रखा। मौजूदा चैंपियन चाओ यांग (237.9 पैरालंपिक रिकार्ड) ने स्वर्ण और हुआंग झिंग (237.5) ने रजत पदक जीता। सिंहराज 9.1 के स्कोर से चौथे स्थान पर खिसक गये थे लेकिन चीनी निशानेाबाज के खराब प्रदर्शन से वह फिर से तीसरे स्थान पर आ गए। हरियाणा के बहादुरगढ़ के रहने वाले सिंहराज केवल चार साल पहले इस खेल से जुड़े। वह फरीदाबाद के सैनिक स्कूल के चेयरमैन भी रह चुके हैं। उनके दादाजी देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे तथा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना में कार्यरत थे। सिंहराज ने यूएई के अल अईन में 2021 पैरा खेल विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतकर पैरालिंपिक में जगह बनाई थी। इस स्पर्धा में भाग लेने वाले एक अन्य भारतीय निशानेबाज दीपेंदर सिंह फाइनल्स में जगह नहीं बना पाए और कुल 10वें स्थान पर रहे। इससे पहले रूबिना फ्रांसिस महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 के फाइनल में सातवें स्थान पर रही। रूबिना ने असाका शूटिंग रेंज में फाइनल में 128.1 अंक बनाये। ईरान की सारेह जवानमार्दी ने 239.2 के विश्व रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। पिछला रिकार्ड (238.1) रूबिना के नाम पर था। रूबिना ने फाइनल्स में पहली सीरीज में 6.6 का निराशाजनक प्रदर्शन किया जिसके बाद उनके लिए वापसी करना मुश्किल हो गया था। वह पहले चरण के बाद हालांकि 93.1 अंक के साथ चौथे स्थान पर थी। भारतीय निशानेबाज ने वापसी की कोशिश की लेकिन शुरुआती गलती की भरपाई नहीं कर पाई और आठ महिलाओं के फाइनल से बाहर होने वाली दूसरी निशानेबाज बनी। इससे पहले रूबिना ने क्वॉलिफिकेशन में 560 अंक बनाकर सातवें स्थान पर रहकर फाइनल्स में जगह बनाई थी। मध्यप्रदेश के जबलपुर की रहने वाली 22 वर्षीय रूबिना ने जून में पेरू के लीमा में विश्व कप में फाइनल्स में विश्व रिकार्ड बनाया था। रूबिना के पांव में जन्म से ही विकार है। मई में वह राष्ट्रीय शिविर में कोविड-19 से संक्रमित हो गयी थी और लीमा विश्व कप से पहले उन्हें लगभग एक महीने तक अभ्यास का मौका नहीं मिला था। विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतकर ही उन्होंने तोक्यो पैरालंपिक के लिये कोटा हासिल किया था। एसएच1 वर्ग में निशानेबाज एक हाथ से ही पिस्टल थामते हैं। उनके एक हाथ या पांव में विकार होता है। इसमें निशानेबाज नियमों के अनुसार बैठकर या खड़े होकर निशाना लगाते हैं।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3DvDBm5

कभी नींद की 30 गोलियां खाकर देना चाहते थे कभी जान लेकिन हौसले की मिसाल बने थे भारत के पहले पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर

मुंबई बात 1967 की है। जीवन से तंग आ चुके थे। वह आत्महत्या करने का इरादा कर चुके थे। INHS अश्विनी नवल हॉस्पिटल के अपने पलंग पर बैठे थे। वह इरादा कर चुके थे कि अब जीवन समाप्त करना है। तभी एक सफाई कर्मचारी उनके पास भागा-भागा आया। उसने पेटकर से 'मटका' खेलने के लिए 10 रुपये मांगे। मटका जुए का एक तरीका है जिसमें लोग कम पैसे लगाकर बड़ा दाम कमाना चाहते हैं। पेटकर शराब के साथ नींद की 30 गोलियां खाने को तैयार थे। उन्होंने कर्मचारी को 10 के बजाय 100 रुपये दिए। जब सफाई कर्मचारी ने उनसे भी उसी नंबर पर जुआ खेलने के लिए कहा तो पेटकर ने उसे 100 का नोट और दिया। और उस नंबर, जो कर्मचारी को सपने में आया था, से एक नंबर ज्यादा पर दाव लगाने को कहा। अगली सुबह पेटकर के लिए अजीब थी। उनके शरीर से शराब और नी की गोलियां बाहर निकालने के लिए काफी उल्टियां भी करवानी पड़ीं। इतना ही नहीं 1965 के उस दिन के बाद, जब उन्हें गोलियां लगी थीं, पहली बार पेटकर को पेशाब करने की इच्छा हुई। पेटकर को जब इस बात का अंदाजा हुआ कि उन्होंने मटके में 40 हजार रुपये जीते हैं, पेटकर का ब्लैडर भी काम पर लग गया था। अगर किस्मत यूं कहानी नहीं लिखती तो शायद भारत को पैरालिंपिक में उसका पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल नहीं मिलता। यह 1972 के पैरालिंपिक की बात है। पेटकर ने वीडियो कॉल पर हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'किस्मत मेरे साथ क्रूर और दयालु दोनों रही है।' पेटकर अब 73 साल के हो गए हैं और पुणे में रहते हैं। उन्होंने अपने लिविंग रूम से ही हमसे बात की। वह कमरा जो ट्रोफी और मेडल से भरा हुआ म्यूजियम है। पेटकर तोक्यो पैरालिंपिक बड़े ध्यान से देख रहे हैं। पद्मश्री से सम्मानित यह तैराक अंतरराष्ट्रीय टीवी चैनलों पर अपनी कहानी सुना रहा है। पेटकर सेना के स्टार बॉक्सर थे। 1965 में जब वह कश्मीर गए तो उन्हें छोटू टाइगर कहा जाता था। कई लोगों ने सोचा कि पाकिस्तानी वायु सेना के हमले के वक्त बजे लंबे सायरन के बाद वे कई लोग मारे गए होंगे जो शाम की चाय का इंतजार कर रहे थे। पेटकर की पिंडली और जांघों में गोलियां लगीं। कुछ गोलियां उनके दाएं गाल और खोपड़ी को छूते हुए गई। वह गिर पड़े। और इसके बाद सेना की एक जीप उनके पैरों के ऊपर से गुजर गई। पेटकर के बेटे अर्जुन बताते हैं, 'एक गोली अब भी उनकी रीढ़ की हड्डी में है।' अर्जुन आयुध फैक्ट्री में काम करते हैं और जिंदगी चलाने के लिए गोलियां ही बनाते हैं। पेटकर के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। वह कुल छह भाई-बहन थे। वह महाराष्ट्र के जिस सांगली जिले से आते थे वह कुश्ती के लिए काफी मशहूर था। पेटकर याद करते हैं कि उनके गांव इस्लामपुर के स्थानीय अखाड़े में ठंडाई मिला करती थी। पेटकर स्थानीय पहलवान गणपत खेडकर से कुश्ती के गुर सीखा करते। और ठंडाई पीकर खुद को तर रखते। पेटकर बताते हैं कि कैसे 12 साल की उम्र में वह पांच रुपये के इनाम के लिए पड़ोस के एक गांव के मुखिया के बेटे से कुश्ती लड़ने चले गए थे। उन्होंने याद किया, 'आमत तौर पर इनाम में बताशे और नारियल होते थे। लेकिन यह मैच इतना बड़ा था कि इस पर गांव वालों ने कपड़े पर काफी सिक्के फेंके थे।' पेटकर के कुश्ती जीतने के बाद चाकू निकल आए थे क्योंकि कंडेरी के लोगों ने इसे अपने गांव की जानबूझकर की गई बेइज्जती समझा था। खेडकर माहौल को भांप गए ते। उन्होंने जीत की रकम पेटकर की जेब में डाली और उन्हें एक ट्रक में बैठाकर पुणे भेज दिया। एक सप्ताह बाद वह अपने अंकल के साथ ट्रेन में थे जो उन्हें बैंगलोर लेकर जा रहे थे। वहां उन्हें स्थानीय सेना भर्ती करवाने ले गए। आर्मी इंस्टिट्यूट में पेटकर ने कड़ी मेहनत की और जल्द ही हॉकी में अच्छा काम किया। पेटकर ने कहा, 'मुझे कर्नाटक टीम में नहीं चुना गया क्योंकि मैं एक मराठी लड़का था।' इसके बाद उन्होंने हॉकी छोड़कर बॉक्सिंग खेलना शुरू किया।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3h6mUEv

Monday, August 30, 2021

इंग्लैंड में क्यों एक ही तरीके से आउट हो रहे हैं कोहली, इरफान ने दिया जवाब

नई दिल्ली विराट कोहली इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। वह लगातार विकेट के पीछे कैच आउट हो रहे हैं। कोहली इसी अंदाज में साल 2014 में आउट हो रहे थे। कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने कोहली की तकनीक पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान की राय इससे अलग है। पठान का मानना है कि कोहली की तकनीक से ज्यादा मसला यह उनके आक्रामक अंदाज से जुड़ा है। इरफान पठान को लगता है कि इंग्लैंड में विराट कोहली की बतौर बल्लेबाज असफलता के पीछे किसी तकनीकी खामी से ज्यादा उनका आक्रामक अंदाज है। कोहली ने सीरीज में अभी तक पांच पारियों में सिर्फ 24.80 के औसत से 124 रन बनाए हैं। लीड्स टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने 55 रन बनाए। इस सीरीज में यह उनकी अभी तक इकलौती हाफ सेंचुरी है। आकाश चोपड़ा के यूट्यूब चैनल पर इरफान ने कहा कि कोहली का इस सीरीज में अच्छा प्रदर्शन न कर पाने की वजह उनका आक्रामक व्यवहार है। पठान ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह तैयारियों की बात नहीं है। विराट कोहली दूसरी टीम पर हावी होना चाहते हैं और इसी वजह से वह ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों को खेल रहे हैं। यह एक छोटी सी बात है। तकनीकी से ज्यादा यह कोहली की आक्रामक सोच है, जिसकी वजह से यह परेशानी हो रही है।' वहीं भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा का कहना है, 'कोहली को पता है कि उन्होंने रन बनाने हैं लेकिन एरर-फ्री बैटिंग करने के लिए उन्हें अपने कंधों पर और भार डालना पड़ रहा है और इस वजह से वह खुलकर नहीं खेल पा रहे हैं। मुझे लगता है कि उन्हें एरर-फ्री बैटिंग का अपना स्टैंडर्ड, जितना वह करने की कोशिश कर रहे हैं उससे थोड़ा नीचे करना चाहिए। विराट कोहली को इंग्लैंड के गेंदबाजों ने ऑफ स्टंप के बाहर गेंदबाजी की है। उन्होंने कोहली के संयम को परखा है और आखिर में उन्हें मजबूर किया है कि वह उन गेंदों को छेड़ें। और ऐसा करते हुए कोहली विकेट के पीछे कैच हुए हैं।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3mMi96l

ऋषभ पंत के लिए कई मुश्किलें, लेकिन पूर्व खिलाड़ियों को उम्मीद लगा सकता है टीम इंडिया का बेड़ा पार

चेन्नई तीन साल पहले () ने दि ओवल (The Oval) पर काउंटर-अटैक करते हुए शानदार सेंचुरी लगाई थी। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके आने का धमक थी। भारत वह मैच नहीं जीत पाया था लेकिन एक विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर यह एक ऐसे सफर की शुरुआत थी जो आने वाले वक्त में भारतीय टीम में अपना एक खास मुकाम बनाएगा। गुरुवार को भारतीय टीम एक बार फिर ओवल में हैं। इस बार सीरीज बराबरी पर ( Test Series) है। और अगर भारत को सीरीज जीतने की ओर कदम बढ़ाना है तो पंत को एक बार फिर अपना रंग दिखाना होगा। 25, 37, 22, 2 और 1- सीरीज में पंत ने अभी तक इतने ही रन बनाए हैं। वह नंबर छह पर बल्लेबाजी कर रहे हैं। और एक ऐसी टीम जो सिर्फ छह बल्लेबाजों के साथ खेल रही है उसके लिए पंत के यह स्कोर काफी नहीं कहे जा सकते। ऑस्ट्रेलिया में इस पोजिशन पर उन्होंने बाकमाल बल्लेबाजी की थी। उन्होंने भारत को सीरीज जितवाने में अहम किरदार निभाया था। इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में भी उन्होंने अहमदाबाद की धूलभरी पिच पर मैच-जिताऊ पारी खेली थी। लेकिन इंग्लैंड की सीमिंग कंडीशन में पंत संघर्ष कर रहे हैं। जेम्स एंडरसन (Jamesh Anderson) और ओली रॉबिनसन (Ollie Robinson) का स्विंग इस 24 वर्षीय बल्लेबाज को काफी परेशान कर रहा है। इसी वजह से उन्होंने स्विंग का सामना करने के लिए क्रीज से बाहर खड़े होने का फैसला किया। इससे वह गेंद को थोड़ा जल्दी खेल सकते थे। साल 2018 में इंग्लैंड में विराट कोहली (Virat Kohli) के लिए इस रणनीति ने कमाल किया था। और शायद यही कारण है कि ज्यादातर भारतीय बल्लेबाज फ्रंट-फुट पर गेंद को खेलने लगे हैं और पंत भी कोई अपवाद नहीं हैं। इसने उस पुरानी थिअरी को खत्म कर दिया जिसमें बैकफुट का इस्तेमाल करने और इंग्लिश परिस्थितियों में गेंद को देर से खेलने को कहा जाता था। हालांकि इस बात से कोई खास फर्क नहीं पड़ता बशर्ते आप रन बना रहे हों। पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक (Dinesh Karthik) ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'पंत ने अपने ज्यादातर रन इसी तरह खेलते हुए बनाए हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में इसी अंदाज में रन बनाए और आपको उन्हें निखरने के लिए थोड़ा वक्त देना होगा। मुझे नहीं लगता कि सीरीज के बीच में आपको कोई बड़ा बदलाव करने की जरूरत है।' लेकिन समस्या यह है इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया में गेंद बहुत ज्यादा सीम या स्विंग नहीं होती है। और ऐसे में लाइन में हार्ड हैंड से खेलना हमेशा खतरनाक नहीं होता। ऐसे में बल्लेबाजों के लिए हैंड-आई कॉर्डिनेशन काफी अहम रहता है। एक अन्य पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज दीप दासगुप्ता (Deep Dasgupta) को लगता है कि पंत को सीरीज के बीच में अपनी तकनीक में बदलाव करने के बजाय, डिफेंस थोड़ा मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'अहम बात यह है कि पंत का सोचने का तरीका बहुत ज्यादा कन्फ्यूज नहीं है। अगर पंत एक पारी में अच्छा खेलते हैं तो वह आपको टेस्ट मैच में जीत दिला सकते हैं, तो आपको उनके साथ मौका ले सकते हैं। लेकिन साथ ही पंत को अपने शॉट-सिलेक्शन को लेकर अधिक सतर्क होने की जरूरत है।' दीप दासगुप्ता (Deep Dasgupta) को लगता है कि पंत के लिए जरूरी है कि वह गेंद को शरीर के अधिक करीब से खेलें। दासगुप्ता ने कहा, 'एंडरसन और रॉबिनसन को मालूम है कि इन परिस्थितियों का कैसे इस्तेमाल करना है। वे ओवर द विकेट ऑफ स्टंप के बाहर गेंदबाजी करते हुए पंत पर काबू रखते हैं। अगर पंत शुरुआत में इससे पार पा लते हैं तो फिर वह अपना तरीका निकाल सकते हैं... आगे बढ़कर खेलना या कुछ भी।' अब दोनो टीमें ओवल पर भिड़ेंगी। यह ऐतिहासिक रूप से ऐसा मैदान है जहां गेंद बहुत ज्यादा हिलती नहीं है। यहां गेंद में बहुत ज्यादा सीम मूवमेंट नहीं होती जो पंत के लिए अच्छी बात हो सकती है। उन्हें इस मैदान लगाए गए पिछले शतक से जरूर आत्मविश्वास हासिल करना चाहिए। कार्तिक ने कहा, 'पंत को पता है कि इन परिस्थितियों से कैसे निपटना है। वह मैच-विनर हैं और मुझे यकीन है कि वह अच्छा करेंगे। '


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3Bu5j0D

योगेश कथूरिया ने पैरालिंपिक में जीती चांदी, मां ने कहा- डॉक्टरों ने कहा था वह कभी चल नहीं पाएगा, मुझे मेरे बेटे पर गर्व है

नई दिल्ली योगेश कथूरिया ने जब में सिल्वर मेडल जीता तो, उनसे पूछा गया कि क्या आप गोल्ड मेडल से चूकने पर निराश हैं, तो उनका जवाब था 'नहीं, मै यहां मेडल जीतने आया था और मेडल के साथ वापस जा रहा हूं।' इस 24 वर्षीय इस खिलाड़ी के लिए मेडल का रंग बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता है। न ही उनके परिवार के लिए। परिवार जो उनकी पीड़ा और संघर्ष के समय में उनका साथी रहा है। उनके लिए कोई भी मेडल सोने से कम नहीं है। जब योगेश 8 साल के थे तो उन्हें लकवे का अटैक आया। उनकी टांगे इससे खराब हो गईं। उनके परिवार ने उन्हें ठीक करवाने की हरसंभव कोशिश की। जिन डॉक्टरों से संपर्क किया था उनमें से कुछ का कहना था कि यह लड़का जिंदगी भर चल नहीं पाएगा। इसकी पूरी जिंदगी व्हीलचेयर पर ही गुजरेगी। किसी ने नहीं सोचा था हरियाणा के बहादुरगढ़ का यह लड़का एक मशहूर पैराएथलीट बनेगा और एक दिन पैरालिंपिक के पोडियम तक पहुंचेगा। उन्होंने सोमवार को साबित किया कि अगर आपके पास लड़ने की इच्छाशक्ति है तो असंभव को हासिल किया जा सकता है। अपने इवेंट में चांदी का तमगा हासिल करने के बाद जब वह तिरंगे के साथ थे तो बहुत भावुक थे। उनकी मां नीना देवी ने कहा, 'साल 2006 में जब मुझे पैरालाइज हुआ, तो हम इलाज के लिए दुनिया के हर कोने में गए। वह तीन साल तक व्हीलचेयर पर रहे। डॉक्टरों ने कहा कि मैं कभी चल नहीं सकता।'


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3jt4W09

सामने आया रणजी ट्रॉफी का शेड्यूल, एक ही ग्रुप में मजबूत मुंबई-कर्नाटक और दिल्ली

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट की रीढ़ की हड्डी मानी जाने वाली रणजी ट्रॉफी के नए सीजन का ऐलान हो चुका है। 5 जनवरी 2022 से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट का आयोजन छह शहरों में किया जाएगा। पहले के शेड्यूल के मुताबिक, यह टूर्नामेंट 16 नवंबर 2021 से 19 फरवरी 2022 तक खेला जाने वाला था। हर टीम को अपने हर मैच से पहले जरूरी पांच दिन के क्वारंटीन में रहना ही होगा। ग्रुप ऑफ डेथ में सितारों से सजी मुंबई, कर्नाटक और दिल्ली है, कई बार की चैंपियन हैदराबाद, महाराष्ट्र और उत्तराखंड भी ग्रुप सी में है। पिछले साल की उपविजेता बंगाल को आसान पूल मिला है। ग्रुप बी में बंगाल के साथ विदर्भ, हरियाणा, केरल, त्रिपुरा और राजस्थान है। गतविजेता सौराष्ट्र, तमिलनाडु, रेलवे, जम्मू-कश्मीर और गोवा ग्रुप डी में है। ग्रुप ए भी उतना ही मजेदार है, जहां गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, सर्विसेज और असम जैसी टीम हैं। ग्रुप ई में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बड़ौदा, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ और पुद्दुचेरी है। प्लेट ग्रुप की शोभा चंडीगढ़, मेघालय, बिहार, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसी टीम बढ़ाएंगी। ग्रुप ए के मैच मुंबई, बी और सी के बेंगलुरु, डी के अहमदाबाद, ई के त्रिवेंद्रम और प्लेट ग्रुप के चेन्नई में होंगे।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3mLkdf9

Vasu Paranjape Passes Away: नहीं रहे मुंबई क्रिकेट के द्रोणाचार्य वासु परांजपे, सचिन-गावसकर को तोप बल्लेबाज बनने में की थी मदद

मुंबईमुंबई क्रिकेट के द्रोणाचार्य माने जाने वाले अनुभवी कोच वासु परांजपे का 82 वर्ष की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी ललिता , दो बेटियां और बेटा जतिन है जो भारत का पूर्व क्रिकेटर और राष्ट्रीय चयनकर्ता रह चुके हैं। वासू को लिटिल मास्टर सुनील गावसकर और मास्टर ब्लास्टर तेंडुलकर के खेल को निखारने का श्रेय भी दिया जाता है। मुंबई क्रिकेट संघ के सचिव संजय नाईक और संयुक्त सचिव शाहआलम शेख ने एक बयान में कहा, ‘मुंबई क्रिकेट संघ श्री वासु परांजपे के दुखद निधन पर शोक व्यक्त करता है जिन्होंने 30 अगस्त 2021 को आखिरी सांस ली। एमसीए की शीर्ष परिषद के सदस्यों, सदस्य क्लबों और क्रिकेट जगत की ओर से हम उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हैं।’ भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावसकर और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने भी परांजपे के निधन पर शोक जताया। भारतीय क्रिकेट खासकर मुंबई क्रिकेट के साथ छह दशक तक परांजपे विभिन्न भूमिकाओं में जुड़े रहे। वह कोच, चयनकर्ता, मेंटर और सलाहकार रहे। मुंबई क्रिकेट की नब्ज को उनके जैसा कोई नहीं पढ़ पाता था। सुनील गावसकर को ‘सनी’ उपनाम उन्होंने ही दिया था। उन्होंने 29 प्रथम श्रेणी मैचों में 785 रन बनाए लेकिन इन आंकड़ों से उनकी महानता बयां नहीं होती। खेल का उनका ज्ञान और खिलाड़ियों की मानसिकता पर काम करने की खूबी उन्हें खास बनाती थी। वह हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी और गुजराती धाराप्रवाह बोलते थे। वह दादर यूनियन टीम के कप्तान रहे जहां से सुनील गावसकर और दिलीप वेंगसरकर जैसे धुरंधर निकले। 1987 विश्व कप से पहले मुंबई में भारतीय टीम की तैयारी के लिए लगाए गए शिविर की देखरेख की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। उनके बेटे जतिन ने हाल ही में पत्रकार आनंद वासु के साथ किताब ‘क्रिकेट द्रोण’ लिखी जिसमें भारत के कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों ने अपने कैरियर में वासु सर की भूमिका का जिक्र किया। (भाषा के इनपुट के साथ)


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3jrNTeX

सीरीज के बाद संन्यास ले सकते हैं जेम्स एंडरसन, पूर्व साथी खिलाड़ी का दावा

नई दिल्ली इंग्लैंड के महान पेसर जेम्स एंडरसन भारत के खिलाफ जारी सीरीज के बाद संन्यास ले सकते हैं। अरे चौंकिए मत! ऐसा हम नहीं बल्कि उन्हीं के एक पूर्व साथी गेंदबाज कह रहे हैं। साल 2009 में आखिरी मैच खेलने वाले स्टीव हार्मिसन का मानना है ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले जाने वाला पांचवां टेस्ट एंडरसन का आखिरी मैच हो सकता है। हार्मिसन ने ऐसा क्यो कहा? 226 टेस्ट विकेट लेने वाले स्टीव हार्मिसन के दिमाग में आया यह ख्याल भले ही किसी मजाक से प्रेरित हो, लेकिन इसके पीछे वह सटीक तर्क भी देते हैं। ऐसे कारण जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल है। 6 फीट चार इंच लंबे इस 43 वर्षीय पेसर ने कहा कि एशेज पूरी तरह से स्थगित या रद्द ही किया जाएगा। क्योंकि इंग्लैंड के कुछ सीनियर प्लेयर्स ने धमकी दी है कि अगर ऑस्ट्रेलियाई सरकार उनके परिवार को साथ में यात्रा करने की अनुमति नहीं देगी तो वह दौरे के बारे में शायद ही सोचे। एंडरसन ने क्या कहा? ऐसे में खतरनाक गेंदबाजी कर रहे 39 वर्षीय जेम्स एंडरसन इस शानदार करियर को अपने घर पर खत्म करने का विचार कर सकते हैं। तीन टेस्ट के बाद फिलहाल पांच मैच की सीरीज 1-1 की बराबरी पर खड़ी है। अगले दो टेस्ट ओवल और ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले जाने हैं। चौथा टेस्ट 2 सितंबर से होना है। हालांकि जेम्स एंडरसन ने पूरी बातों को सिरे से नकार भी दिया। चौथे टेस्ट से हो सकते हैं बाहर दूसरी ओर भारतीय कप्तान विराट कोहली और एंडरसन के बीच चौथे टेस्ट में भिड़ंत देखने को मिलेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि मेजबान टीम एंडरसन को अगले मैच के लिए आराम दे सकती है। तीन सप्ताह के दौरान तीन टेस्ट मैच होने से दोनों टीमों को गेंदबाजों को रोटेट करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। भारत ने इस बारे में स्पष्ट रूख अपनाया है जबकि इंग्लैंड भी उसी रास्ते चल सकती है। एंडरसन ने हालांकि स्पष्ट किया था कि वह टेस्ट सीरीज के हर मैच खेलना चाहते हैं। लेकिन वर्कलोड मैनजमेंट को देखते हुए इंग्लैंड एंडरसन को आराम दे सकता है।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3DxCy5i

सुमित अंतिल और कथूनिया पर पैसों की बारिश, इतने करोड़ देगी हरियाणा सरकार

चंडीगढ़हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को तोक्यो पैरालिंपिकमें विश्व रेकॉर्ड के साथ भालाफेंक में स्वर्ण पदक जीतने वाले सुमित अंतिल को छह करोड़ रुपये और रजत पदक जीतने वाले चक्काफेंक खिलाड़ी योगेश कथूनिया को चार करोड़ रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की। जारी बयान के अनुसार हरियाणा सरकार दोनों को सरकारी नौकरी भी देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतिल ने स्वर्ण पदक जीतकर हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश का दिल जीता है। उन्होंने कहा कि कथूनिया ने भी प्रदेश के साथ देश का नाम रोशन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वर्ण जीतने के बाद अंतिल से फोन पर बात करके कहा था कि उनके प्रदर्शन से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3Dw5tGL

एशियाई युवा मुक्केबाजी में भारत का शानदार प्रदर्शन, खिलाड़ियों ने जीते तीन गोल्ड, छह रजत

नई दिल्लीविश्व युवा कांस्य पदक विजेता विश्वमित्र चोंगथाम (51 किलो), विशाल (80 किलो) और नेहा (54 किलो) ने दुबई में में सोमवार को स्वर्ण पदक जीतकर भारत का दबदबा कायम रखा जबकि छह अन्य भारतीय मुक्केबाजों ने रजत पदक जीते। चोंगथाम ने उजबेकिस्तान के कुजिबोएव अहमदजोन को 4-1 से हराया। दूसरी ओर विशाल ने किर्गीस्तान के अकमातोव संजार को 5-0 से मात दी। महिलाओं में नेहा ने कजाखस्तान की ऐशागुल येलेयुबायेवा को 3-2 से हराया। वहीं विश्वनाथ सुरेश (48 किलो) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा जो मौजूदा युवा विश्व चैंपियन कजाखस्तान के संजार ताशकेनबे से 0-5 से हार गए। वंशज (63.5 किलो) को कजाखस्तान के येरनुर सुयुनबे ने 5-0 से हराया। जयदीप रावत (71 किलो) उजबेकिस्तान के अब्दुल्लाएव अलोखोन के खिलाफ अपना मुकाबला पूरा नहीं कर पाए। महिला वर्ग में निवेदिता (48 किलो) फाइनल में उजबेकिस्तान की फरजोना फाजिलोवा से हार गई। वहीं तमन्ना (50 किलो) को उजबेकिस्तान की सबीना बोबोकुलावा ने 4-1 से हराया। सिमरन को उजबेक मुक्केबाज काजाकोवा फेरूजा ने ही 5-0 से शिकस्त दी। एक महिला समेत पांच मुक्केबाजों ने सेमीफाइनल में हार के बाद कांस्य पदक जीता था। इससे पहले एशियाई जूनियर मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत ने आठ स्वर्ण पदक जीतकर अपने अभियान का अंत किया। इनमें से छह स्वर्ण पदक लड़कियों ने जीते। इसके अलावा भारत ने पांच रजत और छह कांस्य पदक भी हासिल किये। भारत की छह लड़कियां फाइनल में पहुंची थी जिनमें से छह ने स्वर्ण पदक जीते जबकि चार अन्य को रजत पदक मिला। लड़कों के वर्ग में तीन भारतीय फाइनल में पहुंचे थे जिनमें से दो स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे। भारत ने कजाखस्तान के बराबर स्वर्ण पदक जीते। उज्बेकिस्तान नौ स्वर्ण पदक के साथ शीर्ष पर रहा। राष्ट्रीय चैम्पियन रोहित चमोली (48 किग्रा) और भरत जून (81 किग्रा से अधिक) ने लड़कों के वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर शुरुआत की। इसके बाद लड़कियों के वर्ग में वीशू राठी (48 किग्रा), तनु (52 किग्रा), निकिता चंद (60 किग्रा), माही राघव (63 किग्रा), प्रांजल यादव (75 किग्रा) और कीर्ति (81 किग्रा से अधिक) ने सोने के तमगे हासिल किये। कीर्ति ने कजाखस्तान की शुगल्या रीसबेक को 4-1 से जबकि माही राघव ने कजाखस्तान की अलगेरिम काबदोल्दा को 3-2 से हराया। निकिता ने कजाखस्तान की असेम तनातर को जबकि प्रांजल ने कजाखस्तान की अखजान को 4-1 से हराया। रूद्रिका (70 किग्रा) उज्बेकिस्तान की ओइशा तेरोवा से 1-4 से और संजना (81 किग्रा) कजाखस्तान की उमित अहिलकाइर से 0-5 से हार गयी। आंचल सैनी (57 किग्रा) को भी कजाखस्तान की उलझान सारसेनबे से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारत की तरफ से देविका घोरपड़े (50 किग्रा), आरज़ू (54 किग्रा) और सुप्रिया रावत (66 किग्रा) ने लड़कियों के वर्ग में जबकि आशीष (54 किग्रा), अंशुल (57 किग्रा) और अंकुश (66 किग्रा)) ने लड़कों के वर्ग में कांस्य पदक जीते। पिछली एशियाई जूनियर चैंपियनशिप 2019 में भारत 21 पदक (छह स्वर्ण, नौ रजत और छह कांस्य) के साथ तीसरे स्थान पर रहा था। जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक विजेताओं को 4,000 डॉलर जबकि रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 2,000 डॉलर और 1,000 डॉलर दिए जाएंगे। युवा प्रतियोगिता के फाइनल में अब प्रीति (57 किग्रा), प्रीति दहिया (60 किग्रा), खुशी (63 किग्रा), स्नेहा (66 किग्रा), खुशी (75 किग्रा), तनिशबीर (81 किग्रा) महिला वर्ग में फाइनल खेलेंगी।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3BsHHcL

कोहली को बड़ी राहत? चौथे टेस्ट से बाहर हो सकता है यह खतरनाक गेंदबाज

लंदनभारतीय कप्तान विराट कोहली और इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन के बीच चौथे टेस्ट में भिड़ंत देखने को मिलेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि मेजबान टीम एंडरसन को अगले मैच के लिए आराम दे सकती है। तीन सप्ताह के दौरान तीन टेस्ट मैच होने से दोनों टीमों को गेंदबाजों को रोटेट करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। भारत ने इस बारे में स्पष्ट रूख अपनाया है जबकि इंग्लैंड भी उसी रास्ते चल सकती है। इंग्लैंड के मुख्य कोच क्रिस सिल्वरवुड ने एंडरसन और ओली रॉबिंसन के वर्कलोड पर कहा, ‘मैं इन्हें ब्रेक नहीं देना चाहता। हमारे सामने काफी क्रिकेट पड़ा है। टेस्ट अब तेज हो रहे हैं और लगातार होने से मुश्किल हो रही है।’ उन्होंने कहा, ‘ये खिलाड़ी अपना सबकुछ दे रहे हैं। हर दिन जब हम मैदान से बाहर आते हैं तो हम सोचते हैं कि इनके लिए कुछ करें। लेकिन मैं फिलहाल कोई फैसला नहीं ले पा रहा हूं।’ एंडरसन ने हालांकि स्पष्ट किया था कि वह टेस्ट सीरीज के हर मैच खेलना चाहते हैं। लेकिन वर्कलोड मैनजमेंट को देखते हुए इंग्लैंड एंडरसन को आराम दे सकता है। सिल्वरवुड ने इस बात को स्वीकार किया कि एंडरसन को चौथे टेस्ट से बाहर रखने के लिए मनाना कठिन होगा। इंग्लैंड के लिए दिक्कत की बात यह भी है कि उसका एक अन्य गेंदबाज सैम करन अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3mMAErh

गोल्ड जीतने वाले सुमित ने एक ही दिन में 5 बार तोड़ा वर्ल्ड रेकॉर्ड, जानें फिर भी संतुष्ट क्यों नहीं

तोक्योपांच बार विश्व रेकॉर्ड तोड़कर तोक्यो पैरालिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद भारतीय पैरा भालाफेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल ने कहा कि यह उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं था और वह इससे बेहतर करके दिखाएंगे। कुश्ती से भालाफेंक में आए सुमित ने पुरुषों की एफ64 स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर भारत की झोली में दूसरा पीला तमगा डाला। उन्होंने कहा, ‘यह मेरा पहला पैरालिंपिक था और प्रतिस्पर्धा कड़ी होने के कारण मैं थोड़ा नर्वस था।’ उन्होंने कहा, ‘मैं सोच रहा था कि 70 मीटर से अधिक का थ्रो जाएगा। शाायद मैं 75 मीटर भी कर सकता था। यह मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं था लेकिन विश्व रेकॉर्ड तोड़कर मैं खुश हूं।’ मोटरसाइकिल दुर्घटना में बायां पैर गंवाने से पहले सुमित एक पहलवान थे। उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत अच्छा पहलवान नहीं था। मेरे इलाके में परिवार आपको पहलवानी में उतरने के लिए मजबूर करता है। मैंने सात आठ साल की उम्र में ही कुश्ती खेलना शुरू का दिया था और चार पांच साल तक खेलता रहा। मैं इतना अच्छा पहलवान नहीं था।’ उन्होंने कहा, ‘हादसे के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। मैं 2015 में लोगों से मिलने स्टेडियम गया तो मैंने पैरा ऐथलीटों को देखा। उन्होंने कहा कि तुम्हारी कद काठी अच्छी है तो अगला पैरालिंपिक खेल सकते हो। कौन जानता है कि चैम्पियन बन जाओ।’ और ऐसा ही हुआ। उन्होंने कहा, ‘यह सपना सच होने जैसा है। मैं अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पा रहा हूं।’


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3DuXqtT

पहलवान बनना चाहते थे सुमित अंतिल, सड़क हादसे में काटना पड़ा पैर और पलट गई जिंदगी

तोक्यो हरियाणा की मिट्टी ऐसे लाल बड़ा करती है जो खेलों में देश का नाम रोशन करते हैं। सुमित अंतिल भी उन्हीं मे से एक हैं। किसी वक्त कुश्ती में देश को मेडल दिलाने का सपना देखने वाले सोनीपत के इस लाल ने पैरालिंपिक में गोल्डन भाला फेंका है। भारत का यह दूसरा स्वर्ण है। इससे पहले महिला निशानेबाज अवनि लेखरा ने आज सुबह 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 में स्वर्ण जीता था। एक हादसे ने बदली जिंदगी7 जून 1998 को पैदा होने वाले सुमित का यह सफर कठिनाइयों भरा रहा। छह साल पहले हुए सड़क हादसे में एक पैर गंवा दिया। बावजूद इसके उन्होंने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। हर परिस्थिति का डटकर सामना किया। सुमित जब सात साल के थे, तब एयरफोर्स में तैनात पिता की मौत हो गई। तीन बेटियों और इकलौते बेटे को पालना मां के लिए आसान नहीं था। 2015 की एक शाम 17 साल के सुमित की बाइक को किसी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने टक्कर मार दी। दुर्घटना हमेशा-हमेशा के लिए एक पैर गंवाना पड़ा। नकली पैर से नापा आसमांकई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद साल 2016 में सुमित को नकली पैर लगाया गया। खेलों के प्रति तो शुरू से ही रुझान था। साई कोच वीरेंद्र धनखड़ ने उनका मार्गदर्शन किया। दिल्ली में कोच नवल सिंह ने उन्हें जैवलिन थ्रो के गुर सिखाए। साल 2018 में एशियन चैंपियनशिप में 5वीं रैंक मिली। अगले साल 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता फिर इसी साल हुए नेशनल गेम्स में गोल्ड जीतकर अपनी परेशानियों को उपबल्धियों के आगे बौना साबित कर दिया। चंद मिनटों के भीतर बनाए तीन वर्ल्ड रेकॉर्ड68.55 मीटर दूर भाला फेंकते हुए सुमित ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह नया विश्व रेकॉर्ड है। सुमित ने पहले प्रयास में 66.95 मीटर के साथ फाइनल की शुरूआत की और वर्ल्ड रेकॉर्ड तोड़ दिया। दूसरे प्रयास में चंद मिनट पहले बनाया अपना ही वर्ल्ड रेकॉर्ड फिर ध्वस्त कर दिया। इस बात उनका स्कोर 68.08 मीटर था। पांचवें में फिर नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया और पहले स्थान पर रहे। इस तरह फाइनल में तीन वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाया। उनका छठा और अंतिम थ्रो फाउल रहा। यह भारत का बेस्ट पैरालिंपिक सुमित के गोल्ड जीतते ही भारत के पदकों की कुल संख्या सात पहुंच गई। सोमवार को यह पांचवां पदक भी था। सुमित अंतिल से पहले अवनि, देवेंद्र झाझरिया, सुंदर सिंह गुर्जर और योगेश काथुनिया ने भी आज देश के लिए पदक जीते थे। देवेंद्र और सुंदर ने भाला फेंक एफ46 में पदक जीते जबकि योगेश ने डिस्कस थ्रो टी56 में पदक अपने नाम किया। इस बीच, भारत के संदीप चौधरी एफ44 वर्ग में 62.20 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे और पदक लाने से चूक गए। संदीप का बेस्ट थ्रो 66.18 मीटर का है और अगर वह यह प्रदर्शन दोहराने में सफल होते तो पदक ला सकते थे। भारत अबतक इस पैरालंपिक में दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम कर चुका है। पिछला बेस्ट चार पदकों के साथ रियो 2016 में आया था।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3DFwXtM

सुमित, आपने देश का नाम रोशन किया....गोल्ड मेडल जीतने पर पीएम मोदी ने किया फोन

नई दिल्लीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को स्वर्ण पदक विजेता सुमित अंतिल को फोन किया और उनके पैरालिंपिक में उनके लचीलेपन की भावना के लिए बधाई दी। भारत के सुमित अंतिल ने तोक्यो के नैशनल स्टेडियम में पुरुषों की भाला फेंक (स्पोर्ट क्लास F64) में स्वर्ण पदक जीता। सुमित ने फाइनल में तीन बार विश्व रेकॉर्ड में सुधार किया। उन्होंने पोडियम के शीर्ष पर चढ़ने के अपने पांचवें प्रयास में 68.55 मीटर का एक ऐतिहासिक थ्रो फेंका। प्रधानमंत्री ने सुमित से यह भी कहा कि उन्होंने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और युवा उनके प्रदर्शन को देखकर प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा, ‘यह मेरा पहला पैरालम्पिक था और प्रतिस्पर्धा कड़ी होने के कारण मैं थोड़ा नर्वस था।’ उन्होंने कहा, ‘मैं सोच रहा था कि 70 मीटर से अधिक का थ्रो जाएगा। शाायद मैं 75 मीटर भी कर सकता था। यह मेरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं था लेकिन विश्व रिकॉर्ड तोड़कर मैं खुश हूं।’ मोटरसाइकिल दुर्घटना में बायां पैर गंवाने से पहले सुमित एक पहलवान थे। उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत अच्छा पहलवान नहीं था। मेरे इलाके में परिवार आपको पहलवानी में उतरने के लिए मजबूर करता है। मैने सात आठ साल की उम्र में ही कुश्ती खेलना शुरू का दिया था और चार पांच साल तक खेलता रहा। मैं इतना अच्छा पहलवान नहीं था।’ उन्होंने कहा, ‘हादसे के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। मैं 2015 में लोगों से मिलने स्टेडियम गया तो मैंने पैरा ऐथलीटों को देखा। उन्होंने कहा कि तुम्हारी कद काठी अच्छी है तो अगला पैरालम्पिक खेल सकते हो। कौन जानता है कि चैम्पियन बन जाओ।’ और ऐसा ही हुआ। उन्होंने कहा, ‘यह सपना सच होने जैसा है। मैं अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पा रहा हूं।'


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3juFnfy

नाराज लड़की का दिल बहलाने के लिए जाते थे रेंज और अब गोल्ड जीत रचा इतिहास

जयपुरअवनि लेखरा के पिता प्रवीण जब 2015 में पहली बार उन्हें निशानेबाजी रेंज ले गए तो उनका मकसद कार दुर्घटना के अपाहिज हुई उनकी बेटी की जिंदगी से नाराजगी कम करके उसका दिल बहलाना था। उन्हें क्या पता था कि उनका यह प्रयास उनकी बेटी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा। नाराजगी कम करने के लिए की गई पहल की परिणित आज तोक्यो पैरालिंपिक में अवनि के ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के रूप में हुई। प्रवीण लेखरा कहा, ‘उस दुर्घटना के पहले वह काफी सक्रिय थी और हर गतिविधि में भाग लेती थी लेकिन उस हादसे ने उसकी जिंदगी बदल दी।’ उन्होंने कहा, ‘वह हालात से काफी खफा थी और किसी से बात नहीं करना चाहती थी। माहौल बदलने के लिए मैं उसे जगतपुरा में जेडीए निशानेबाजी रेंज ले जाता था जहां से उसे निशानेबाजी का शौक पैदा हुआ।’ उन्होंने इसके बाद अपनी बेटी को ओलिंपिक चैम्पियन निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा ‘ अ शॉट एट हिस्ट्री : माय आब्सेसिव जर्नी टू ओलिंपिक गोल्ड’ खरीदकर दी। अवनि ने किताब पढ़ना शुरू किया और ओलिंपिक में भारत के पहले व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा से प्रेरित होने लगी। शुरुआत में उसे दिक्कतें आई लेकिन उनके पिता ने कहा, ‘उसके कोच ने उसका पूरा साथ दिया और वह अच्छा प्रदर्शन करने लगी। उसने राज्य स्तर पर स्वर्ण और 2015 में राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक जीता। आज उसने पैरालिंपिक में स्वर्ण जीता है जिसकी उससे अपेक्षा की जा रही थी।’ अवनि के पदक जीतने के बाद से उनके पिता का फोन लगातार बज रहा है। दूसरी ओर करौली जिले के छोटे से गांव देवलेन में भी जश्न का माहौल है जहां के रहने वाले सुंदर सिंह गुर्जर ने भालाफेंक में कांस्य पदक जीता। उनके भाई हरिओम गुर्जर ने कहा, ‘पूरा गांव खुश है। उसे स्वर्ण की उम्मीद थी हालांकि वह चूक गया।’ उन्होंने बताया कि गांव भर के लोग या तो उनके घर पर टीवी देखने जमा थे या मंदिर में विशेष पूजा करके उसकी सफलता की कामना कर रहे थे। कांस्य जीतने के बाद मिठाइयां बांटी गई। हरिओम ने कहा, ‘सुंदर के दो बच्चे हैं और एक का जन्म पिछले साल जन्माष्टमी पर हुआ। वहीं इस जन्माष्टमी पर सुंदर ने देश के लिए पदक जीता।’ सुंदर की मां ग्राम पंचायत में सरपंच हैं। भालाफेंक में रजत जीतने वाले देंवद्र झाझरिया भी राजस्थान से हैं। मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए स्वर्ण पदक पर तीन करोड़, रजत जीतने वाले को दो करोड़ और कांस्य जीतने वाले को एक करोड़ रुपये नकद पुरस्कार देने का ऐलान किया।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3BnyZwz

तू भी है राणा का वंशज.. सुमित के गोल्ड जीतने पर ट्विटर पर बल्ले-बल्ले, पीएम मोदी समेत दिग्गजों ने दी बधाई

भारत के स्टार ऐथलीट सुमित अंतिल ने तोक्यो पैरालिंपिक 2020 में भारत के लिये पुरुषों की भालाफेंक एफ64 स्पर्धा में विश्व रेकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 68.55 मीटर का थ्रो करते हुए इतिहास रचा। भारत का यह दूसरा स्वर्ण है। इससे पहले महिला निशानेबाज अवनि लेखरा ने आज सुबह स्वर्ण जीता था। भारत का इस पैरालंपिक में यह दूसरा स्वर्ण पदक है जबकि उसने कुल सात पदक अपने नाम किए हैं। उनके गोल्ड जीतते ही सोशल मीडिया बधाइयों का ताता लग गया। पीएम मोदी सहित तमाम दिग्गजों ने उन्हें बधाइयां दी हैं।

भारत के सुमित अंतिल ने चल रहे तोक्यो पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए भाला फेंक क्लास एफ64 वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। सुमित ने फाइनल में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए 68.55 मीटर का थ्रो किया और स्वर्ण पदक जीता।


Sumit Antil Won Gold medal: तू भी है राणा का वंशज.. सुमित ने जीता पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल, पीएम मोदी समेत इन दिग्गजों ने दी बधाई

भारत के स्टार ऐथलीट सुमित अंतिल ने तोक्यो पैरालिंपिक 2020 में भारत के लिये पुरुषों की भालाफेंक एफ64 स्पर्धा में विश्व रेकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 68.55 मीटर का थ्रो करते हुए इतिहास रचा। भारत का यह दूसरा स्वर्ण है। इससे पहले महिला निशानेबाज अवनि लेखरा ने आज सुबह स्वर्ण जीता था। भारत का इस पैरालंपिक में यह दूसरा स्वर्ण पदक है जबकि उसने कुल सात पदक अपने नाम किए हैं। उनके गोल्ड जीतते ही सोशल मीडिया बधाइयों का ताता लग गया। पीएम मोदी सहित तमाम दिग्गजों ने उन्हें बधाइयां दी हैं।





from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3gH6WQY

हरियाणा के लाल का कमाल... सुमित आंतिल ने फेंका गोल्डन भाला, पैरालिंपिक में भारत को दिलाया सातवां मेडल

तोक्यो पैरालिंपिंक खेलों में भारत का स्वपनिल सफर जारी है। जैवलिन थ्रो में सुमित आंतिल ने सोमवार को गोल्डन भाला फेंका। एफ64 क्लास के इस खिलाड़ी ने अपने पहले ही ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर हरियाणा में सोनीपत के गांव खेवड़ा का नाम रोशन किया। सड़क हादसे में अपना एक पैर गंवाने वाले सुमित फाइनल में बेहतरीन फॉर्म में थे। एक के बाद एक उन्होंने दो वर्ल्ड रेकॉर्ड तोड़े। इस तरह भारतीय खेमे के पास मेडल्स की कुल संख्या सात हो गई है, जो इन खेलों के इतिहास में अबतक का बेस्ट प्रदर्शन भी है। इससे पहले सुबह स्टार खिलाड़ी और दो बार के स्वर्ण पदक विजेता देवेंद्र झाझरिया ने सिल्वर जीता था। पुरुषों के इसी भाला फेंक के एफ46 स्पर्धा में सुंदर सिंह गुर्जर को कांस्य पदक मिला, वह झाझरिया के बाद तीसरे स्थान पर रहे। चक्का फेंक में योगेश कथूनिया ने दूसरा स्थान हासिल किया था। साल 2015 में सड़क दुर्घटना में अपना एक पैर गंवाने वाले सुमित ने कई माह अस्पताल में गुजारे। 2016 में पुणे में उन्हें नकली पैर लगाया गया। कोच वीरेंद्र धनखड़ ने किया मार्गदर्शन।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/38E0RQV

भारत को तोक्यो पैरालिंपिक में बड़ा झटका, विनोद कुमार को नहीं मिलेगा जीता हुआ ब्रॉन्ज

तोक्योभारत के चक्का फेंक ऐथलीट ने सोमवार को टूर्नामेंट के पैनल द्वारा विकार के क्लासिफिकेशन निरीक्षण में ‘अयोग्य’ पाए जाने के बाद पैरालिंपिक की पुरुषों की एफ52 स्पर्धा का कांस्य पदक गंवा दिया। बीएसएफ के 41 साल के जवान विनोद कुमार ने रविवार को 19.91 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो से एशियाई रेकॉर्ड बनाते हुए पोलैंड के पियोट्र कोसेविज (20.02 मीटर) और क्रोएशिया के वेलिमीर सैंडोर (19.98 मीटर) के पीछे तीसरा स्थान हासिल किया था। किसी प्रतिस्पर्धी ने हालांकि इस नतीजे को चुनौती दी। आयोजकों ने एक बयान में कहा, ‘पैनल ने पाया कि एनपीसी (राष्ट्रीय पैरालिंपिक समिति) भारत के ऐथलीट विनोद कुमार को ‘स्पोर्ट क्लास’ आवंटित नहीं कर पाया और खिलाड़ी को ‘क्लासिफिकेशन पूरा नहीं किया’ (सीएनसी) चिन्हित किया गया।’ इसके अनुसार, ‘ऐथलीट इसलिए पुरुषों की एफ52 चक्का फेंक स्पर्धा के लिए अयोग्य है और स्पर्धा में उसका नतीजा अमान्य है।’ एफ52 स्पर्धा में वो ऐथलीट हिस्सा लेते हैं जिनकी मांसपेशियों की क्षमता कमजोर होती है और उनके मूवमेंट सीमित होते हैं, हाथों में विकार होता है या पैर की लंबाई में अंतर होता है जिससे खिलाड़ी बैठकर प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेते हैं। पैरा खिलाड़ियों को उनके विकार के आधार पर वर्गों में रखा जाता है। क्लासिफिकेशन प्रणाली में उन खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति मिलती है जिनका विकार एक सा होता है। आयोजकों ने 22 अगस्त को विनोद का क्लासिफिकेशन किया था। विनोद कुमार के पिता 1971 भारत-पाक युद्ध में लड़े थे। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में जुड़ने के बाद ट्रेनिंग करते हुए वह लेह में एक चोटी से गिर गए थे जिससे उनके पैर में चोट लगी थी। इसके कारण वह करीब एक दशक तक बिस्तर पर रहे थे और इसी दौरान उनके माता-पिता दोनों का देहांत हो गया था।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3jq46S3

विराट कोहली के लिए सीरीज में आसान नहीं होगी राह, नासिर हुसैन की भारतीय कप्तान को 'चेतावनी'

नई दिल्ली इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने भारतीय कप्तान विराट कोहली के बारे में एक 'चेतावनी' जारी की है। हुसैन ने कहा है कि स्विंग और सीम होती गेंद के सामने विराट कोहली सहज नजर नहीं आ रहे हैं और ऐसे में जैसे-जैसे सीरीज आगे बढ़ेगी उनके लिए मुश्किलें बढ़ती जाएंगी। उन्होंने कहा कि विराट कोहली लगातार 'अनिश्चितता के कॉरिडोर' में गेंदें खेल रहे हैं और बॉल उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेट के पीछे जा रही है। विराट कोहली इस सीरीज की सभी पांच पारियों में विकेट के पीछे कैच आउट हुए हैं। इसमें जेम्स एंडरसन और ओली रॉबिनसन ने उन्हें दो-दो बार और सैम करन ने उन्हें एक बार आउट किया है। नासिर हुसैन ने विराट कोहली की बल्लेबाजी की तकनीकी समस्या की ओर ध्यान दिलाया। इस वजह से उन्हें गेंद की लाइन का सही अंदाजा लगाने में परेशानी हो रही है। डेली मेल के अपने कॉलम में नासिर हुसैन ने लिखा, 'कोहली ने ऐसी गेंदों को खेल रहे हैं जो उन्हें छोड़नी चाहिए। ऐसा लगता है कि उनके पास तकनीकी समस्या है। मैंने इसके बारे में पहले भी ध्यान दिलाया था। यह बैकफुट की उनकी पोजिशन को लेकर भी है। और साथ ही वह एंडरसन और रॉबिनसन की गेंदों की सही लाइन पिक नहीं कर पा रहे हैं। कोहली यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें गेंद को छोड़ना चाहिए या खेलना चाहिए। या उन्हें खुद को इनस्विंगर के लिए तैयार करना चाहिए या नहीं। उन्हें नहीं पता कि उन्हें क्या करना है। यह हाई क्लास बोलिंग है और कोहली के आगे भी कोई आसानी नहीं आने वाली।' इंग्लैंड के पूर्व कप्तान ने कहा कि विराट कोहली ने हेडिंग्ले टेस्ट के तीसरे दिन अच्छी बल्लेबाजी की। और हाफ सेंचुरी भी बनाई। उन्होंने हालांकि कहा कि कोहली ऐसा इस वजह से कर पाए क्योंकि पुरानी गेंद ने उनकी बल्लेबाजी आसान बना दी थी। उन्होंने कहा, 'तीसरे दिन उन्होंने अच्छा खेल दिकाया। ज्यादातर पुरानी गेंद के खिलाफ। यहां वह गेंद को छोड़ रहे थे। लेकिन बाद में नई गेंद के सामने उनके लिए गेंद को छोड़ना आसान नहीं था। और शनिवार को वह फिर उसी तरीके से आउट हुए।' हुसैन ने इंग्लैंड को हालांकि चेतावनी दी कि वह हेडिंग्ले टेस्ट में ऐतिहासिक जीत के बाद भारत को फिलहाल चुका हुआ न माने। हुसैन ने हालिया वक्त में भारतीय टीम के प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने इंग्लैंड को याद दिलाया कि भारत ने ऐडिलेड में करारी हार के बाद किस तरह शानदार वापसी की थी। हुसैन ने कहा, 'इंग्लैंड को यह नहीं सोचना चाहिए कि उन्होंने सारी मेहनत कर ली और अब वह गुरुवार से शुरू हो रहे सीरीज के चौथे और ओल्ड ट्रैफर्ड में होने वाले आखिरी टेस्ट मैच में भारतीय टीम को आसानी से हरा सकती है। याद रखिए, भारत पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐडिलेड में 36 रन के स्कोर पर ऑल आउट हो गया था। लेकिन इसके बाद उसने सीरीज में दमदार जीत हासिल की। और वह भी तब जब कोहली घर लौट गए थे। भारत के पास काफी मजबूती और लड़ने का जज्बा है। और इन सबके बीच में उनका कप्तान है।' भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का चौथा टेस्ट मैच 2 सितंबर गुरुवार से द ओवल में खेला जाएगा।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3mJNUgp

विराट कोहली को लगा झटका, आईपीएल से बाहर हुए वॉशिंगटन सुंदर

नई दिल्ली भारत के प्रतिभाशाली क्रिकेटर 19 सिंतबर से यूएई में होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दूसरे चरण में नहीं खेल पाएंगे क्योंकि इंग्लैंड दौरे में उनकी उंगली की लगी चोट अभी तक ठीक नहीं हुई और वह राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में फिटनेस परीक्षण में नाकाम रहे। आईपीएल में वाशिंगटन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) की तरफ से खेलते हैं। वह भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर गये थे लेकिन अभ्यास के तौर पर काउंटी मैच खेलते समय उनकी उंगली चोटिल हो गयी और फिर वह स्वदेश लौट आए थे। यह 21 वर्षीय ऑफ स्पिनर और उपयोगी बल्लेबाज काउंटी टीम की तरफ से खेला था और भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज की गेंद पर चोटिल हो गये थे। आरसीबी ने बयान में कहा, ‘रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के आलराउंडर वाशिंगटन सुंदर उंगली की चोट के कारण आईपीएल 2021 के बाकी मैचों में नहीं खेल पाएंगे।’ उनकी जगह बंगाल क्रिकेटर आकाश दीप को आरसीबी की टीम में शामिल किया गया है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि वाशिंगटन ने कुछ दिन पहले बैंगलुरू में एनसीए में फिटनेस परीक्षण में हिस्सा लिया था लेकिन वह इसमें असफल रहे थे। इससे उनका टी20 विश्व कप में खेलना भी संदिग्ध है जो आईपीएल के तुरंत बाद खेला जाएगा।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/2WtoGb7

POLL: क्या इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच में सूर्यकुमार यादव को जगह मिलनी चाहिए?

POLL: क्या इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच में सूर्यकुमार यादव को जगह मिलनी चाहिए?

from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3mIPteB

India vs England: क्या चौथे टेस्ट में सूर्यकुमार यादव को मिलेगी टीम इंडिया में जगह, आकाश चोपड़ा ने दिया सीधा जवाब

नई दिल्ली लीड्स टेस्ट में हार के बाद चौथे टेस्ट के लिए भारतीय टीम में संभावित बदलावों की खबरें सामने आने लगी हैं। माना जा रहा है कि मध्यक्रम में अजिंक्य रहाणे के स्थान पर इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के अगले मैच में को जगह मिल सकती है। रहाणे बीते कुछ समय से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं और टीम में उनकी जगह सवालों के घेरे में है। हालांकि टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। चोपड़ा का मानना है कि चौथे टेस्ट मैच के लिए सूर्यकुमार यादव को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलेगी। भारतीय टीम का मध्यक्रम बीते कुछ समय से अपेक्षा के अनुसार खेल नहीं दिखा पा रहा है। कई विशेषज्ञ टीम में हनुमा विहारी को भी शामिल करने की मांग कर रहे हैं। अपने यूट्यूब चैनल पर जारी वीडियो में चोपड़ा से जब पूछा गया कि अगले मैच में वह हनुमा विहारी या यादव में से किसे प्लेइंग इलेवन में शामिल करेंगे? इस पर चोपड़ा ने कहा, 'सूर्यकुमार यादव- नहीं, उन्हें टीम में जगह नहीं मिलने वाली। मैं उन्हें लेकर थोड़ा पक्षपाती हो सकता हूं। मैं उन्हें पसंद करता हूं लेकिन आप यादव को किसके स्थान पर टीम में शामिल करेंगे? क्या आप उन्हें छठे बल्लेबाज के तौर पर खिलाएंगे?' पूर्व सलामी बल्लेबाज ने इसके पीछे का कारण भी दिया। चोपड़ा का मानना है कि चोटी के छह बल्लेबाजों में से किसी को भी टीम से बाहर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'जो लोग खेल रहे हैं- रोहित, राहुल, पुजारा, कोहली, रहाणे और ऋषभ पंत- किसी को भी बाहर नहीं कर सकते। अगर ये छह खिलाड़ी बने रहते हैं तो फिपर यादव के लिए कोई जगह नहीं है।' अगर भारतीय टीम अतिरिक्त बल्लेबाज के साथ उतरने का फैसला करती है तो यादव या विहारी को मौका मिल सकता है। विहारी ने सिडनी में मैच बचाने वाली पारी खेली थी, ऐसे में उन्हें अनुभव के आधार पर तरजीह मिल सकती है। वहीं चोपड़ा को लगता है कि अश्विन को प्लेइंग इलेवन में जगह मिल सकती है। उन्होंने कहा, 'अश्विन की बात करें तो आप ओवल में खेलने जा रहे हैं। वहां गेंद थोड़ी टर्न होती है और पिच थोड़ी सपाट है। वह सर्रे के लिए खेलते हैं और पिच को अच्छी तरह जानते भी हैं। ऐसे में उनके नाम पर विचार हो सकता है।' हालांकि 43 वर्षीय इस पूर्व खिलाड़ी ने यह भी कहा कि अश्विन को टीम में शामिल करने का फैसला पिच और इस बात पर निर्भर करेगा कि टीम इंडिया किस कॉम्बिनेशन के साथ उतरना चाहती है। उन्होंने कहा, 'पर जब तक आप पिच नहीं देख लेते, तो मुझे नहीं लगता कि आप कोई जवाब दे सकते हैं। आपको देखना होगा कि यह क्या चार तेज गेंदबाजों की पिच है या दो स्पिनर्स के साथ उतरा जा सकता है।'


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3kCwqjy

Sunday, August 29, 2021

देखें वीडियो: जब स्टुअर्ट बिन्नी की गेंदबाजी ने किया था बांग्लादेश को पस्त, सिर्फ चार रन देकर झटके थे छह विकेट

नई दिल्ली ऑलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान किया है। उन्होंने सोमवार को एक पोस्ट के जरिए इस बात की घोषणा की। बिन्नी का करियर यूं तो बहुत लंबा नहीं रहा लेकिन एक मैच उसमें ऐसा रहा जिसे लंबे समय तक याद किया जाए। 7 साल पहले उन्होंने ऐसा खेल दिखाया था जो अभी तक कोई भी भारतीय नहीं तोड़ पाया है। एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक मैच में भारत की ओर से सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करने का रेकॉर्ड बिन्नी के ही नाम है। मुकाबला 17 जून 2014 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में खेला गया था। विकेट और परिस्थितियां गेंदबाजी के लिए मुफीद थीं। बांग्लादेश ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। बांग्लादेश ने कमाल का खेल दिखाया। उसके तेज गेंदबाज तस्कीन अहमद ने पांच विकेट लिए। पूरी भारतीय टीम 41 ओवर के इस मैच में 25.3 ओवर की खेल पाई। टीम सिर्फ 105 रन ही बना पाई। भारत की ओर से इस मैच में कप्तानी कर रहे सुरेश रैना से सबसे ज्यादा 27 रन बनाए। रॉबिन उथप्पा ने 14 और चेतेश्वर पुजारा ने 11 रन बनाए। इनके अलावा कोई अन्य बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा नहीं छू पाया। बांग्लादेश के लिए यह स्कोर बहुत बड़ा नहीं था। लेकिन गेंद स्विंग हो रही थी। और भारतीय बोलर्स के पास मौका था। भारत की ओर से स्टुअर्ट बिन्नी ने सिर्फ 4.4 ओवर में दो मेडन फेंके और सिर्फ चार रन देकर छह विकेट लिए। वहीं होमित शर्मा ने 22 रन देकर चार विकेट लिए। बांग्लादेश की पूरी टीम 101 मिनट में 17.4 ओवर खेलकर ही 58 पर सिमट गई। शर्मा ने विकेट लेने की शुरुआत की और मिडल ऑर्डर को बिन्नी और शर्मा ने समेट दिया। भारत ने 47 रन (डकवर्थ लुईस) से हराया था।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/38Dn3dX

स्टुअर्ट बिनी ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया

स्टुअर्ट बिनी ने अंतरराष्ट्रीय और फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान किया है। बिनी ने भारत के लिए छह टेस्ट मैच और 14 वनडे इंटरनैशनल मैच खेले थे। इसके अलावा उन्होंने तीन टी20 इंटरनैशनल मैच भी खेले। पिता रोजर बिनी की ही तरह स्टुअर्ट भी लोअर मिडल ऑर्डर में तेज बल्लेबाजी करने के लिए जाने जाते थे। इसके अलावा भी मीडियम पेस सीम और स्विंग गेंदबाजी भी कर सकते थे। वह सीम बोलिंग के लिए मददगार परिस्थितियों में काफी उपयोगी साबित होते थे। बिनी ने एक बयान जारी कर कहा, 'मैं आपको बताना चाहूंगा कि मैंने अंतरराष्ट्रीय और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है।' उन्होंने आगे कहा, 'अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए अद्भुत खुशी और गर्व की बात रही है।' उन्होंने आगे कहा, 'मेरे क्रिकेटीय जीवन में बीसीसीआई ने बहुत अहम किरदार निभाया मैं इसका आभार व्यक्त करता हूं। कुछ साल में उनका भरोसा और समर्थन काफी शानदार रहा है। अगर कर्नाटक राज्य और उनका सपॉर्ट नहीं होता तो मेरा क्रिकेटीय सफर शुरू नहीं होता। राज्य की कप्तानी करना और ट्रोफी जीतना मेरे लिए गर्व की बात है।'


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3DqBy2K

तोक्यो पैरालिंपिक जैवलिन थ्रो: देवेंद्र झाझरिया ने जीता सिल्वर, सुंदर सिंह गुर्जर ने हासिल किया ब्रॉन्ज मेडल

तोक्यो भारत के देवेंद्र झाझरिया ने पुरुषों के जैवलिन थ्रो- एफ46 में सिल्वर मेडल हासिल किया। सोमवार को तोक्यो ओलिंपिक में उन्होंने 64.35 मीटर भाला फेंककर चांदी का तमगा अपने नाम किया। वहीं सुंदर सिंह गुर्जर ने इसी इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 64.01 मीटर भाला फेंका। इसके साथ ही पैरालिंपिक 2020 में भारत के पदकों की संख्या सात हो गई है। झाझरिया ने शुरुआत में सिर्फ 60 मीटर भाला फेंका। इसके बाद उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में 64.35 मीटर भाला फेंका। इसके साथ ही भारत की पदक की उम्मीद जिंदा हो गई। चौथे और पांचवें थ्रो में भारतीय पैरा-एथीलट का थ्रो फाउल रहा। उनका आखिरी थ्रो 61.23 मीटर का रहा। सुंदर ने भी धीमी शुरुआत की लेकिन अपने पांचवें प्रयास में 64 मीटर को पार किया। वहीं तीसरे भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी अजीत सिंह 8वें स्थान पर रहे।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3sWbW97

Tokyo Paralympics: योगेश कथूरिया ने डिस्कस थ्रो में जीता सिल्वर मेडल

तोक्यो भारत के योगेश कथूरिया ने तोक्यो पैरालिंपिक में पुरुष डिस्कस थ्रो (F56) में सिल्वर मेडल जीता है। सोमवार को उन्होंने अपना बेस्ट थ्रो 44.38 मीटर का किया। कथूरिया ब्राजील के वर्ल्ड रेकॉर्डधारी बेतिस्ता डोस सैंतोस क्लॉडिने ने 45.59 मीटर का थ्रो किया था। कथूरिया ने शुरुआत फाउल के साथ की थी। लेकिन इसके बाद उन्होंने 42.84 मीटर का थ्रो किया। इसके बाद उन्होंने इसमें सुधार किया और 43.55 मीटर का थ्रो किया। हालांकि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो फाइनल के लिए बचाकर रखा। यहां उन्होंने 44.38 मीटर का थ्रो किया। यह तोक्यो पैरालिंपिक में भारत का पांचवां पदक है। 24 साल के कथूरिया ने दुबई 2019 में पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/2Wz4J2C

Tokyo Paralympics: अवनि लखेड़ा ने किया कमाल, निशानेबाजी में जीता गोल्ड मेडल

तोक्यो भारत की ने तोक्यो पैरालिंपिक में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। लेखारा ने फाइनल में 249.6 अंक हासिल किए। उन्होंने वर्ल्ड रेकॉर्ड की बराबरी की। वहीं डिस्कस थ्रो में भारत के योगेश कथूरिया ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल हासिल किया। वहीं भारत के देवेंद्र झाझरिया ने सिल्वर मेडल और सुंदर सिंह गुर्जर ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। देवेंद्र हालांकि गोल्ड मेडल की तिकड़ी नहीं लगा पाए लेकिन चांदी जीतकर उन्होंने भारत की झोली में पदक डाला। उन्होंने फाइनल में 7वें स्थान के साथ क्वॉलिफाइ किया था और कुल 621.7 अंक हासिल किए थे। अवनि ने फाइनल में अपने खेल में काफी सुधार किया। उन्होंने फाइनल में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने तीसरे और चौथे प्रयास में उन्होंने 104.9, 104.8 अंक हासिल किया। और क्वॉलिफिकेशन के आखिरी प्रयास में 104.1 अंक जुटाए थे। भारत के योगेश कथूरिया ने तोक्यो पैरालिंपिक में पुरुष डिस्कस थ्रो (F56) में सिल्वर मेडल जीता है। सोमवार को उन्होंने अपना बेस्ट थ्रो 44.38 मीटर का थ्रो किया। कथूरिया ब्राजील के वर्ल्ड रेकॉर्डधारी बेतिस्ता डोस सैंतोस क्लॉडिने ने 45.59 मीटर का थ्रो किया था।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3gLOBC7

इंग्लैंड के कोच ने बताई आक्रामकता की वह रणनीति, जिससे टीम इंडिया को किया चित

लंदनइंग्लैंड के मुख्य कोच क्रिस सिल्वरवुड ने रविवार को कहा कि भारत के खिलाफ तीसरे टेस्ट क्रिकेट मैच में उनकी टीम की बड़ी जीत में ‘नियंत्रित आक्रामकता’ ने अहम भूमिका निभायी। इससे पूर्व लार्ड्स टेस्ट में उनके खिलाड़ी अपनी भावनाओं को काबू में नहीं रख पाये थे। दूसरे टेस्ट मैच के दौरान भारत और इंग्लैंड के खिलाड़ियों के बीच कई अवसरों पर शाब्दिक बाण चले थे। भारत ने पांचवें दिन यह मैच जीता था। लीड्स में हालांकि मैदानी वातावरण कुछ शांत दिखा। इंग्लैंड ने इस मैच में पारी और 76 रन से जीत दर्ज करके अच्छी वापसी की। सिल्वरवुड ने कहा, ‘जो (रूट) और मैंने लॉर्ड्स टेस्ट को लेकर विचार किया कि हम क्या सीख ले सकते हैं और कैसे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने (हेडिंग्ले में) जो कुछ किया उसमें नियंत्रित आक्रामकता शामिल थी।’ उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से उन्होंने सहीं लेंथ से गेंदबाजी की, जिस तरह से उन्होंने भारत के निचले क्रम के बल्लेबाजों को दबाव में रखा और उन्हें हर समय निर्णय लेने के लिये मजबूर किया। मेरा मानना है कि आप नियंत्रित तरीके से आक्रामक हो सकते हो और मुझे लगता है कि उन्होंने ऐसा अच्छी तरह से किया।’ सिल्वरवुड से पूछा गया कि क्या भारत को लीड्स की तरह दबाव में रखा जा सकता है, उन्होंने कहा, ‘उन पर हावी होना महत्वपूर्ण है क्योंकि हम जानते हैं कि वह बहुत अच्छी टीम है। एक बार जब वे हावी हो जाते हैं तो उन्हें रोकना मुश्किल होता है।’ उन्होंने कहा, ‘हमने उन्हें बैकफुट पर रखा और हमने उन पर दबाव बनाये रखा। इससे पता चलता है कि हम क्या कर सकते हैं। हमारे खिलाड़ियों ने रणनीति पर अच्छी तरह से अमल किया। इससे पता चलता है कि एक बार आप यदि विरोधी टीम को बैकफुट पर भेज देते हो तो दबाव बनता है और हम उन पर हावी हो सकते हैं।’


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3kwKevX

बेहद मजबूत हुआ इंग्लैंड, दो खतरनाक पेसर्स की वापसी, बटलर की खलेगी कमी

लंदन तेज गेंदबाज और आल राउंडर क्रिस वोक्स को पूर्ण फिटनेस हासिल करने के बाद रविवार को इंग्लैंड की भारत के खिलाफ चौथे टेस्ट के लिए चुनी टीम में शामिल किया गया जबकि जोस बटलर अपने दूसरे बच्चे के जन्म के लिए पत्नी के साथ होने के कारण इसमें नहीं खेल पाएंगे। वुड्स के दाएं कंधे में लार्ड्स में दूसरे टेस्ट के दौरान क्षेत्ररक्षण करते हुए चोट लग गई थी जबकि वोक्स भी ऐड़ी की चोट से उबर गए हैं जिसके कारण वह जुलाई में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे श्रृंखला के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहे थे। वोक्स शुक्रवार को एक घरेलू टी-20 टीम में खेले थे। बेन स्टोक्स और जोफ्रा आर्चर जैसे अहम खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में वोक्स को शामिल करना टीम के लिए अच्छा होगा। बटलर की अनुपस्थिति में जॉनी बेयरस्टो विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे। सैम बिलिंग्स को रिजर्व विकेटकीपर के रूप में शामिल किया गया है। तेज गेंदबाज साकिब महमूद को टीम से बाहर किया गया है। चौथा टेस्ट दो सितंबर से ओवल में शुरू होगा। श्रृंखला अभी 1-1 से बराबर है। इंग्लैंड की टीम: जो रूट (कप्तान, मोईन अली, जेम्स एंडरसन, जॉनी बेयरस्टो (विकेटकीपर), सैम बिलिंग्स (विकेटकीपर), रोरी बर्न्स सैम करन, हसीब हमीद, डैन लारेंस, डेविड मलान, क्रेग ओवरटन, ओली पोप, ओली रॉबिन्सन, क्रिस वोक्स और मार्क वुड।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3BmBrTX

आयरलैंड ने लिया जिम्बाब्वे से बदला, दूसरे T20 में हराकर सीरीज की बराबर

डबलिनआयरलैंड ने 5 मैचों की सीरीज के दूसरे टी20 मैच में जिम्बाब्वे () को 7 विकेट से हरा दिया। इसके साथ ही उसने सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली है। मैच में जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट पर 152 रन बनाए। जवाब में आयरलैंड टीम ने 18.3 ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर 153 रन बनाते हुए जीत दर्ज की। इस मैच के हीरो रहे केविन ओब्रायन, जिन्होंने आयरलैंड के लिए 41 गेंदों में 7 चौके और छक्का की मदद से 60 रनों की धांसू पारी खेली। इसके अलावा उन्होंने पॉल स्टार्लिंग (37) के साथ पहले विकेट के लिए 6.2 ओवरों में 59 रन जोड़ते हुए जबरदस्त शुरुआत दी, जिसका फायदा जॉर्ज डॉक्रेल ने उठाया। डॉक्रेल ने 26 गेंदों में 3 चौके की मदद से नाबाद 33 रन बनाते हुए टीम की जीत सुनिश्चत की। इससे पहले जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया था। उसके लिए सबसे अधिक मिल्टन शुम्भा ने 27 गेंदों में 4 चौके और 2 छक्के की मदद से नाबाद 46 रनों की पारी खेली, जबकि रियन बर्ल ने 33 गेंदों में 3 चौके और 2 छक्के उड़ाते हुए नाबाद 37 रन बनाए। हालांकि, गेंदबाजों ने इन दोनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। इससे पहले जिम्बाब्वे ने पहले टी-20 में रोमांचक जीत दर्ज की थी, जबकि सीरीज का तीसरा टी-20 एक सितंबर को खेला जाएगा। यह मैच भी डबलिन में होगा।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3jq94hC

क्यों रोका गया पैरालिंपियन विनोद कुमार का ब्रॉन्ज मेडल, कब तक आएगा फैसला, जानें सबकुछ

तोक्यो पैरालिंपिक खेलों में रविवार का दिन खत्म होते-होते भारत की झोली में तीन मेडल आ चुके थे। देशभर में खुशी का माहौल था। पीएम मोदी तक ने ट्वीट कर भारतवासियों को बधाई दे दी थी, लेकिन कुछ ही देर बाद पता चला कि चक्का फेंक एथलीट विनोद कुमार का ब्रॉन्ज मेडल रोक दिया गया है। बीएसएफ के 41 साल के जवान विनोद कुमार ने 19.91 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो से एशियाई रेकार्ड बनाते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। वह पोलैंड के पियोट्र कोसेविज (20.02 मीटर) और क्रोएशिया के वेलिमीर सैंडोर (19.98 मीटर) के पीछे रहे जिन्होंने क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक अपने नाम किए। क्या है पूरा मामला? डिस्कस थ्रो ऐथलीट विनोद कुमार ने पुरूषों की F52 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था, लेकिन उनकी दिव्यांगता क्लासीफिकेशन पर विरोध के बाद पदक रोक दिया गया है। आयोजकों ने 22 अगस्त को विनोद का क्लासिफिकेशन किया था। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस आधार पर क्लासिफिकेशन को चुनौती दी गई है। खेलों के आयोजकों के एक बयान के अनुसार पदक समारोह भी 30 अगस्त के शाम के सत्र तक स्थगित कर दिया गया है। क्या होती है F52 स्पर्धाइस कैटेगरी में वो एथलीट हिस्सा लेते हैं, जिनकी मांसपेशियों की क्षमता कमजोर होती है और उनके मूवमेंट सीमित होते हैं, हाथों में विकार होता है या पैर की लंबाई में अंतर होता है, जिससे खिलाड़ी बैठकर प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेते हैं। भारत के दल प्रमुख गुरशरण सिंह ने कहा कि विनोद कुमार का पदक अभी बना रहेगा। उन्होंने कहा, ‘विरोध एक देश या शायद एक से ज्यादा देश से हो सकता है, हम नहीं जानते क्योंकि इसका खुलासा नहीं किया जा सकता। विनोद का पैरालिंपिक शुरू होने से पहले जो क्लासिफिकेशन किया गया था, उसमें कुछ मुद्दा हो सकता है।’ सोमवार को आएगा फैसला भारत के दल प्रमुख गुरशरण सिंह ने बताया कि, ‘विनोद का नतीजा जो कांस्य पदक है, वो अब भी बरकरार है और इस संबंध में फैसला आज आने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अब बहुत देर हो गई है। इस पर कल फैसले की उम्मीद है।' इन दोनों एथलीटों के पदकों से पहले भाविनाबेन पटेल ने सुबह महिलाओं की एकल टेबल टेनिस क्लास 4 स्पर्धा में रजत पदक जीता था। भारत के 24 सदस्यीय एथलेटिक्स दल से इस बार शानदार प्रदर्शन (कम से कम 10 पदक) की उम्मीद है और उसने इसी कड़ी में रविवार को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर अच्छी शुरूआत की। निषाद ने लॉन्ग जंप में जीता मेडल 21 वर्षीय निषाद कुमार ने 2.06 मीटर की कूद लगाकर एशियाई रेकॉर्ड बनाया और दूसरे स्थान पर रहे। अमेरिका के डलास वाइज को भी रजत पदक दिया गया क्योंकि उन्होंने और निषाद कुमार दोनों ने समान 2.06 मीटर की कूद लगाई। एक अन्य अमेरिकी रोडरिक टाउनसेंड ने 2.15 मीटर की कूद के विश्व रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी स्पर्धा में एक अन्य भारतीय राम पाल 1.94 मीटर की कूद से पांचवें स्थान पर रहे। किसान के बेटे हैं निषाद हिमाचल प्रदेश के अम्ब शहर के निषाद कुमार के पिता किसान हैं। उनका दायां हाथ खेत पर घास काटने वाली मशीन से कट गया था तब वह आठ वर्ष के थे। साल के शुरू में जब वह बेंगलुरू के भारतीय प्राधिकरण केंद्र में ट्रेनिंग कर रहे थे तो कोविड-19 से भी संक्रमित हो गए थे। टी47 क्लास स्पर्धा में एथलीट के एक हाथ के ऊपरी हिस्से में विकार होता है जिससे उसके कंधे, कोहनी और कलाई से काम करने पर कुछ असर पड़ता है। निषाद कुमार ने साल के शुरू में दुबई में हुई फाज्जा विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में पुरूषों की ऊंची कूद टी46/47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने 2009 में पैरा एथलेटिक्स में हिस्सा लेना शुरू किया था। भाविनाबेन ने दिलाया पहला मेडल तोक्यो पैरालंपिक खेलों में भारत का खाता भाविनाबेन ने खोला था। वह पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बनी हैं। वह टेबल टेनिस क्लास 4 स्पर्धा के महिला एकल फाइनल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की झाउ यिंग से 0-3 से हार गई थी। भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) की मौजूदा अध्यक्ष दीपा मलिक पांच साल पहले रियो पैरालिंपिक में गोला फेंक में रजत पदक के साथ पैरालिंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं थी।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/38mLr37

8 वर्ष की उम्र में गंवाया हाथ, अब रचा इतिहास... कौन हैं निषाद? जिनकी पीएम मोदी ने भी की तारीफ

तोक्यो8 वर्ष की उम्र में एक हाथ गंवाया, तोक्यो पैरालिंपिक से ठीक पहले महामारी कोरोना वायरस का शिकार हुए, लेकिन निषाद कुमार हौसला नहीं हारे। उन्होंने रविवार को तोक्यो पैरालिंपिक की पुरुषों की ऊंची कूद टी47 स्पर्धा में एशियाई रेकॉर्ड के साथ सिल्वर मेडल जीता। 21 वर्षीय कुमार ने 2.06 मीटर की कूद लगाकर एशियाई रेकॉर्ड बनाया और दूसरे स्थान पर रहे। अमेरिका के डलास वाइज को भी सिल्वर मेडल दिया गया क्योंकि उन्होंने और कुमार दोनों ने समान 2.06 मीटर की कूद लगायी। एक अन्य अमेरिकी रोडरिक टाउनसेंड ने 2.15 मीटर की कूद के विश्व रेकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसी स्पर्धा में एक अन्य भारतीय राम पाल 1.94 मीटर की कूद से पांचवें स्थान पर रहे। हिमाचल प्रदेश के अम्ब शहर के निषाद कुमार के पिता किसान हैं। उनका दायां हाथ खेत पर घास काटने वाली मशीन से कट गया था तब वह आठ वर्ष के थे। साल के शुरू में जब वह बेंगलुरु के भारतीय प्राधिकरण केंद्र में ट्रेनिंग कर रहे थे तो कोविड-19 से भी संक्रमित हो गए थे। टी47 क्लास स्पर्धा में एथलीट के एक हाथ के ऊपरी हिस्से में विकार होता है जिससे उसके कंधे, कोहनी और कलाई से काम करने पर कुछ असर पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘तोक्यो से एक और खुशी की खबर आयी है। बहुत खुश हूं कि निषाद कुमार ने पुरुषों की ऊंची कूद टी47 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीत लिया है। वह उत्कृष्ट कौशल वाले शानदार ऐथलीट हैं। उन्हें बधाई।’ कुमार ने साल के शुरू में दुबई में हुई फाजा विश्व पैरा ऐथलेटिक्स ग्रां प्री में पुरुषों की ऊंची कूद टी46/47 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने 2009 में पैरा ऐथलेटिक्स में हिस्सा लेना शुरू किया था। यह भारत का तोक्यो पैरालिंपिक में दूसरा मेडल है। उनसे पहले भाविनाबेन पटेल ने रविवार को महिलाओं की एकल टेबल टेनिस क्लास 4 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3Bq13iG

बाबा महाकाल से आशीर्वाद लेने पहुंचे शिखर धवन, वर्ल्ड कप टीम में नहीं मिली है जगह

from Sports News in Hindi, Live Score, खेल समाचार, खेल न्यूज़ https://ift.tt/Nlgjqk9