नई दिल्लीदिग्गज तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग का मानना है कि सितारों से सजे बल्लेबाजी क्रम के बावजूद भारतीय टीम को के ‘कौशल और रवैये’ की कमी खल रही है। वेस्टइंडीज के इस पूर्व पेसर ने कहा कि टीम इंडिया के पूर्व कैप्टन धोनी बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए काफी काम आते थे। ऑस्ट्रेलिया ने सिडनी में खेले गए पहले वनडे में भारत को 66 रन से हराकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। अब सीरीज का दूसरा वनडे सिडनी में ही रविवार को होना है। होल्डिंग ने यूट्यूब चैट शो ‘होल्डिंग नथिंग बैक’ में कहा, ‘भारत के लिए टारगेट का पीछा करना मुश्किल था। भारत को महेंद्र सिंह धोनी की कमी खली।’ पढ़ें, उन्होंने कहा, ‘धोनी आम तौर पर बल्लेबाजी क्रम में निचले हाफ में उतरते हैं और लक्ष्य का पीछा करते हुए नियंत्रण बना लेते हैं। उनके टीम में रहते भारत ने अतीत में लक्ष्य का बखूबी पीछा किया है।’ धोनी ने इसी साल अगस्त में इंटरनैशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने आखिरी बार न्यूजीलैंड के खिलाफ पिछले साल वर्ल्ड कप मुकाबले में अपना अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। 66 साल के इस दिग्गज ने कहा, ‘भारत के पास काफी प्रतिभाशाली बल्लेबाज हैं जो स्ट्रोक्स खेलने में माहिर हैं। हार्दिक पंड्या ने शानदार पारी खेली लेकिन फिर भी भारत को धोनी जैसे खिलाड़ी की जरूरत थी। सिर्फ कौशल ही नहीं बल्कि रवैये के मामले में भी।’ हार्दिक ने इस मैच में 90 रन की पारी खेली लेकिन टीम को जीत दिलाने में कामयाब नहीं हो सके। उनके अलावा शिखर धवन ने भी 74 रन बनाए। पढ़ें, होल्डिंग ने कहा कि भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए धोनी के रहते आत्मविश्वास से भरपूर रहती थी। उन्होंने कहा, ‘वे टॉस जीतकर फील्डिंग से नहीं डरते थे क्योंकि उन्हें पता था कि धोनी क्या कर सकते हैं और उनके बल्लेबाज कितने सक्षम हैं।’ उन्होंने कहा, ‘लक्ष्य का पीछा करते समय धोनी कभी घबराते नहीं थे। उन्हें अपनी क्षमता का पता था और वे विचलित नहीं होते थे। जो भी साथ में बल्लेबाजी करता था, वह उससे बात करते रहते और उसकी मदद करते थे। भारत का बल्लेबाजी क्रम शानदार है लेकिन लक्ष्य का पीछा करने में धोनी की बात ही अलग थी।’ होल्डिंग ने पहले वनडे में भारत की लचर फील्डिंग की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘एससीजी बड़ा मैदान है लेकिन भारतीयों की फील्डिंग बेहद औसत रही। गेंद फील्डर के सिर के ऊपर से निकल गई लेकिन छक्का नहीं हुआ। सीमारेखा से इतना दूर नहीं रहना चाहिए था।’
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