Wednesday, August 4, 2021

हमें देश के लिए कुछ करना है... हाथ में हॉकी, दिल में जज्बा... इन बेटियों को आज दुआएं दीजिए

नई दिल्ली भारतीय हॉकी के लिए ये बेहद सुनहरा रहा है। हमारा राष्ट्रीय खेल बुलंदियों में पहुंचने के बाद एकदम से गुम होता गया। लेकिन तोक्यो ओलिंपिक में पुरुष और महिला दोनों ही टीमों ने अच्छे-अच्छे को धराशाई कर दिया। आज वक्त है इतिहास रचने का। ये दिन, ये तारीख और ये वक्त हमेशा हर दिल में याद रखा जाएगा। आज महिला हॉकी टीम का सेमीफाइनल मुकाबला है। पूरे देश में उनकी जीत के लिए कामनाएं हो रही हैं। छोटे-छोटे गांवों से निकलकर तोक्यो तक पहुंचींभारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी ऐसी जगहों से आई हैं जो शायद हिंदुस्तान के नक्से में तो हैं लेकिन कोई जानता नहीं है। सोनीपत, शाहाबाद (हरियाणा), कोलासिब, लुलकिडीही, रोशनाबाद या बड़कीचापर। ये लड़कियां यहां से निकलकर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी देश के विभिन्न हिस्सों से आती हैं। लेकिन वो सभी बराबर जुनून और एक ही उद्देश्य के लिए जूझ रही हैं। इन सबका एक ही मंत्र है। देश के लिए कुछ करना है। इनके सीने में जो आग दहक रही है वो है जीत की। ये मैदान पर अपना सबकुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। आज कोई इनसे पूछे कि जिंदगी और जीत मे क्या बड़ा है तो शायद इनका जवाब जीत होगा। अब सामना बेहद मजबूत टीम सेइन खिलाड़ियों ने पहले ही देश को गौरवान्वित करने के लिए काफी कुछ किया है। खुद को भी बेंच से पोडियम के दावेदारों में बदल दिया है। भारतीय महिला हॉकी टीम ऑस्ट्रेलिया पर एक सराहनीय जीत के साथ तोक्यो खेलों में सेमीफाइनल में पहुंची थीं। अपने पहले ओलिंपिक पदक से दो कदम दूर रानी रामपाल और उनकी साहसी लड़कियां बुधवार को अपने अंतिम -4 संघर्ष में दुनिया के चौथे नंबर की टीम अर्जेंटीना के खिलाफ दावा ठोंकेंगी। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया को टीम ने परास्त किया है उसी तरह उम्मीद है कि इस टीम का भी वही हाल होगा। शानदार फॉर्म में हैं अर्जेंटीना की टीमलास लियोनस ( अर्जेंटीना वुमेंस हॉकी टीम) शानदार फॉर्म में हैं। दो बार की रजत पदक विजेता (2000, 2012) टी वापसी करने की पूरी कोशिश में जुटी हुई है। 2016 के रियो ओलंपिक में एक गोल से चूक गए थे। दोनों टीमों ने इस साल की शुरुआत में एक-दूसरे का सामना किया था। दोनों एक दूसरे का गेम भी समझते हैं। भारत ने जनवरी में ही इस टीम के साथ मैच खेला था। जब भारत ने विभिन्न टीमों के खिलाफ सात मैच खेलते हुए अर्जेंटीना का दौरा किया था। ऑस्ट्रेलिया से अलग खेल खेलती है अर्जैंटीना की टीमऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना के बीच मुख्य अंतर उनका ऑन-फील्ड खेल का नजरिया है। जबकि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास आक्रामकता और गति है।, अर्जेंटीना अपने खेल में पारंपरिक है। वो मिडफ़ील्ड पर ध्यान केंद्रित करता रहा है और मैच की गति को नियंत्रित करता है। गेम में स्लो रहना उनकी स्ट्रैटजी का एक हिस्सा है। जिससे वो विपक्षी टीम को कमजोर करने की कोशिश करते हैं। दोहराना होगा अपना दमदार प्रदर्शनभारत को न केवल अपनी स्किन से बाहर खेलना होगा बल्कि उन्हें हॉकी के बोल्ड ब्रांड को भी प्रदर्शित करना होगा जैसे उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया था। भारत के पास एक बड़ा मौका होगा यदि डिफेंडर पेनल्टी कॉर्नर से दूर रह सकते हैं जोकि अर्जेंटीना की ताकत में से एक है। साथ ही मिडफील्ड और स्ट्राइकरों को आगे बढ़ने के लिए फ्लैक्स का अच्छी तरह से इस्तेमाल करना होगा।


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