केप टाउन के चेहरे की निराशा साफ पढ़ी जा सकती थी। वह जानते थे कि शायद यह उनके करियर पर फुल स्टॉप लगा सकता है। ऐसी गेंदें बल्लेबाज को अकसर मिलती हैं लेकिन वक्त अगर साथ हो वह बल्ले के किनारे और दस्ताने से बचती हुई विकेटकीपर या स्लिप के पास जाती हैं। और वक्त अगर साथ न हो तो यही गेंद दस्तानों या बल्ले को बस छू भर जाती हैं। रहाणे के साथ यही हुआ। कागिसो रबाडा की इस गेंद पर रहाणे का विकेट लिखा था। और इस कमाल की गेंद पर ऐसा ही हुआ। रबाडा की यह इस गेंद को अनप्लेबल कहा जा सकता था। गेंद ने टप्पा खाया और ऑफ स्टंप के बाहर तेजी से उछली। रहाणे को कोई आइडिया नहीं था कि आखिर क्या हुआ। ज्यादातर बल्लेबाज ऐसी गेंदों पर परेशान होते हैं। पर समय रहाणे के साथ नहीं रहा है। वह सिर्फ परेशान नहीं हुए बल्कि चौथे स्टंप के बाहर पड़ी इस गेंद पर खेलने का प्रयास कर बैठे। गेंद विकेटकीपर वेरेइने के पास गई। वह कैच तो नहीं कर पाए पर उन्होंने किसी तरह इस गेंद तक अपना हाथ पहुंचा दिया। स्लिप में खड़े कप्तान डीन एल्गर तो जैसे इसी मौके की तलाश में थे। उन्होंने रीबाउंड पर गेंद को आसानी से लपक लिया। मैदानी अंपायर ने इसे नॉट आउट दिया था। रहाणे भीतर ही भीतर सोच रहे होंगे कि बस साउथ अफ्रीका रीव्यू न ले। लेकिन साउथ अफ्रीकी खेमे को पता था कि शिकार हो चुका है। कप्तान ने बिना देरी किए तीसरे अंपायर के पास जाने की अपील की। रीप्ले में आवाज साफ आई। और अल्ट्रा एज ने साफ कर दिया कि गेंद उनके ग्लव्स को छूकर गई है। भारत को दिन की शुरुआत में ही दूसरा झटका लगा। रहाणे सिर्फ 1 र बनाकर पविलियन लौट गए।
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