Tuesday, January 11, 2022

'सेंचुरी नहीं बना पाए विराट लेकिन अपनी इस पारी पर वह लंबे समय तक गर्व कर सकते हैं'

नई दिल्ली ' ने बीते पांच-छह साल में इससे मुश्किल 40 रन नहीं बनाए होंगे।' केपटाउन टेस्ट के पहले दिन चायकाल पर कोहली पविलियन जा रहे थे तो महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने ये बात कॉमेंट्री के दौरान कही। इसी बात से समझ सकते हैं कोहली की यह पारी कितनी अलग, कितनी जुदा रही। कोहली 781 दिनों का सूखा तोड़ने के लिए पूरी तरह समर्पित नजर आ रहे थे। हालांकि, वह 79 रन पर आउट हो गए लेकिन बेशक कोहली की यह पारी लंबे वक्त तक याद रखी जाएगी। इस पारी में संयम था, धैर्य था, जज्बा था, जुझारूपन था। यूं तो कोहली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्हें किसी को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं। और वाकई उन्होंने जो हासिल किया है उसके बाद उन्हें किसी सवाल का जवाब देने की जरूरत नहीं। लेकिन बल्ले को धार की जरूरत होती है। और वह धार तब आती है जब उससे रन निकलें। जितना ज्यादा यह हथियार चलता है उतना बढ़ता जाता है उनका पैनापन। कोहली आज उस बादशाह की तरह दिखे जो अपना साम्राज्य जताना चाहता हो। जज्बे से भरपूर। विकेट पर समय बिताना उनकी पहली कोशिश रही। जाते ही गेंदबाज पर हावी हो जाना कोहली का अंदाज रहा है। लेकिन यहां वह अलग दिखे। खुद को काबू में रखते हुए। गेंदबाजों ने पूरी कोशिश की कोहली को फंसाने की। लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंदबाजी की। टप्पा थोड़ा पीछे। कोहली को ललचाते हुए। लेकिन इस बार कोहली लालच में नहीं फंसे। यह उनका पसंदीदा शॉट रहा है। उन्होंने इस पर काफी रन भी बनाए हैं लेकिन आज नहीं। अपनी आक्रामकता रोकना भी कई बार लंबा मोर्चा लेने की रणनीति होती है। और यही करते दिखे कोहली। कोहली जैसे साल 2004 में सिडनी में सचिन तेंदुलकर की पारी से सीख लेकर आए हों। सेंचुरियन में पहले टेस्ट के बाद सुनील गावस्कर ने सोनी टेन से बातचीत में कोहली के लिए एक सलाह दी थी कि उन्हें सचिन से बात कर पूछना चाहिए कि आखिर कैसे उन्होंने ऑफ साइड पर शॉट खेलने की प्रवृत्ति पर काबू किया था। अब कोहली ने सचिन से बात की या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन उनकी पारी में उसका अक्स जरूर दिख रहा था। पारी की शुरुआत में वह गेंद खेलने से ज्यादा उसे छोड़ रहे थे। कोहली को फेंकी पहली 100 गेंदों में कोहली को 68 गेंदें ऑफ स्टंप के बाहर फेंकी गईं। प्लान तैयार था। कोहली को उनकी पसंद की जगह पर आउट करने का। काफी समय से यह प्लान कारगर भी रहा। शायद पुराने कोहली होते तो उन पर जरूर आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश करते। यहां उन्होंने उन्हें छोड़ा। इन 68 में से 44 गेंदों को उन्होंने विकेटकीपर के दस्तानों में जाने दिया। इरादे साफ थे, 'मैं नहीं फंसूंगा।' बात सिर्फ आक्रामकता रोकने भर की नहीं थी। साउथ अफ्रीका के गेंदबाजों को थकाने की भी रही। साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने जब देखा कि उनके तरकश के सबसे कारगर तीर नहीं चल रहे हैं तो उन्होंने रणनीति बदली। वह विकेट के करीब आए। और यही कोहली चाहते थे। अच्छे बल्लेबाज की खासियत होती है कि वह जो गेंद फेंकी जाए उस पर अपनी पसंद का शॉट लगाए लेकिन महान बल्लेबाज वह होता है जो गेंदबाज को वहां फेंकने पर मजबूर करे जहां उसने शॉट खेलना है। और कोहली की इस पारी में वह आत्मविश्वास नजर आया। साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों ने कोहली को जब भी ऑफ स्टंप के बाहर हल्की सी शॉर्ट पिच गेंद फेंकी उन्होंने जाने दिया। इंतजार किया गेंदबाज के गलती करने का। और जब गेंदबाज ओवर पिच हुआ तो उन्होंने उसका फायदा उठाया। उन्होंने आक्रामकता को काबू किया था लेकिन खोया नहीं था। वह सलमान खान की फिल्म का डायलॉग है ना- 'मैंने कुश्ती छोड़ी है, लड़ना नहीं भूला।' तो कोहली गेंदबाज को यह जता रहे थे कि शांत रहकर खेलना है इसका अर्थ यह नहीं कि खराब गेंद को बख्श दिया जाएगा। अक्टूबर 2019 में पुणे में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए मुकाबले के बाद कोहली ने पारी में पहली बार 200 से ज्यादा गेंद खेलीं। यह बताता है कि कितनी खास थी कप्तान की यह पारी। कोहली किस हद तक टिके रहना चाहते थे, उसे यूं समझिए कि एक वक्त पर चेतेश्वर पुजारा उनसे काफी तेजी से रन बना रहे थे। इन दोनों बल्लेबाजों के लिए समय जरा उलट भी रहा है। पुजारा जहां जरूरत से ज्यादा डिफेंसिव होने की वजह से फंस रहे थे तो कोहली की नैसर्गिक आक्रामकता ही उनके खिलाफ रही। पुजारा आखिर 43 रन बनाकर लौटे। पर कोहली टिके रहे। उन्हें कोई समस्या नहीं थी। पर समस्या दूसरे छोर पर रही। एक के बाद एक विकेट गिरते रहे। अजिंक्य रहाणे फिर असफल रहे। ऋषभ पंत ने कुछ देर कोहली का साथ निभाया। पांचवें विकेट के लिए हाफ सेंचुरी की पार्टनरशिप की। लेकिन पंत जैसे आउट हुए उससे कप्तान कोहली खुश नहीं रहे होंगे। आखिर में कोहली अकेले ही लड़ते नजर आए। दूसरे छोर पर विकेट गिरते गए। और कोहली को जरूरत महसूस हुई तेजी से रन बनाने की। और इसी चक्कर में वह कागिसो रबाडा की गेंद पर विकेट के पीछे लपके गए। क्रिकेट नंबर्स का खेल है भले ही आप इसे शतक न मानें। और यह है भी नहीं। लेकिन कोहली की इस पारी की खूबसूरती किसी शतक से कम नहीं। कोहली भले ही 781 दिन से चला आ रहा शतकों का सूखा न तोड़ पाएं हों लेकिन आज जो पारी उन्होंने खेली उस पर वह और उनके फैंस को अच्छा महसूस हुआ होगा। और जैसा कि कोहली के आउट होने के बाद सुनील गावस्कर ने कहा- 'कोहली 79 रन बनाकर आउट हुए लेकिन वह अपनी इस पारी पर बहुत-बहुत गर्व कर सकते हैं।'


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