भुवनेश्वरपीएम नरेंद्र मोदी ने पहली बार आयोजित हो रहे ‘खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ का शुभारंभ आज विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया। 22 फरवरी से लेकर एक मार्च तक चलने वाले इस महाकुंभ की शुरुआत करते हुए पीएम ने कहा, 'मैं आपके साथ टेक्नॉलॉजी के माध्यम से जुड़ रहा हूं, लेकिन वहां जो माहौल है, जो उत्साह है, जो जुनून है, जो ऊर्जा है, उसको मैं अनुभव कर सकता हूं। आज ओडिशा में नया इतिहास बना है। भारत के इतिहास में पहले की शुरुआत आज से हो रही है।' बता दें कि देश भर के 150 से भी अधिक विश्वविद्यालयों के लगभग 3500 ऐथलीट इस आयोजन में भाग लेंगे। बड़े टूर्नमेंटों में 200 से अधिक मेडल जीतने का लक्ष्य आने वाले सालों में खेलों में मेडल जीतने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए पीएम बोले- भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है, जिन देशों में खेलों की लीग होती है। भारत के 3 हजार से अधिक युवा खिलाड़ियों को बहुत बहुत बधाई। साथियों आने वाले सालों में कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, एशियन पैरा गेम्स और यूथ गेम्स में 200 से अधिक मेडल जीतने का लक्ष्य तो है ही, उससे भी अहम आपके अपने प्रदर्शन में सुधार, आपके खुद के सामर्थ्य को नई ऊंचाई देना है। याद रखिए भुवनेश्वर में किया गया आपका प्रदर्शन आपके सपनों को, देश को सपनों को और आपके परिवार के सपनों को आगे बढ़ाएगा। भुवनेश्वर में आप एक दूसरे से तो कंपीट कर ही रहे हैं, खुद से भी कंपीट कर रहे हैं। देश में दोगुना हुई ऐथलीटों की संख्या इस दौरान पीएम ने भारत की स्टार ऐथलीट दुती चंद का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा, 'आज का दिन सिर्फ टूर्नमेंट की शुरुआत मात्र नहीं है, बल्कि की शुरुआत खेलों के लिए क्रांति है। यह राष्टव्यापि अभियान है। इसे यूनिवर्सिटी लेवल के लिए शुरू किया गया है। गुवाहाटी में क्या बदलाव आया है यह हाल के दिनों में देखने को मिला है। देश में महज 3 वर्षों में ऐथलीटों की संख्या 3 हजार से बढ़कर 6 हजार से भी अधिक हो गई है। यानी संख्या सीधे दोगुनी हो गई है। खेल और उसकी सुविधाओं में भी गजब का सुधार आया है।' टूटे 80 रेकॉर्ड, 56 बेटियों के नामउन्होंने खेलो इंडिया के दौरान टूटे रेकॉर्डों की बात करते हुए कहा- रोचक बात है कि इस खेल के दौरान कुल 80 रेकॉर्ड टूटे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि 80 में से 56 रेकॉर्ड बेटियों के नाम रहे हैं। यह भी महत्वपूर्ण बात है कि सामान्य घर से निकलकर सामने आने वालों ने ये कारनामे किए हैं। उन्हें ऐक्सपोजर का मौका मिला है। पहले ऐसा नहीं था। अब युवाओं को न केवल मौके मिले हैं, बल्कि उन्हें एक बड़ा मंच भी मिला है। खेलो इंडिया का इंटरनैशनल लेवल पर दिखा असर उन्होंने खेलों इंडिया से फायदे को बताते हुए कहा- खेलो इंडिया अभियान तो युवा टैलेंट को पहचानने का जरिया बना है। स्पोर्ट्स के प्रमोशन टैलेंट की पहचान हो या टेनिंग हो या फिर चयनप्रक्रिया हो। हर तरफ ट्रांसपरेंसी को बढ़ावा दिया गया है। इसका असर इंटरनैशनल लेवल पर भी देखने को मिला है। भारत के तमाम युवाओं ने भारत के लिए मेडल जीते हैं। पीएम मोदी ने कहा, 'खिलाड़ी अपना ध्यान सिर्फ अपने श्रेष्ठ प्रदर्शन पर लगाए, बाकी की चिंता देश कर रहा है। प्रयास ये है कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी बढ़े। हमारे युवा, हमारे खिलाड़ी हर प्रकार के करियर के लिए फिट रहें, इसके लिए राष्ट्रीय खेल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान बनाए जा रहे हैं।' टूर्नमेंट के बारे में... ‘खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ का आयोजन ओडिशा सरकार के सहयोग से केंद्र द्वारा किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में तीरंदाजी, ऐथलेटिक्स, मुक्केबाजी, तलवारबाजी, जूडो, तैराकी, भारोत्तोलन, कुश्ती, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, फुटबॉल, हॉकी, टेबल टेनिस, टेनिस, वॉलीबॉल, रग्बी और कबड्डी सहित कुल 17 खेलों का आयोजन होगा। इस टूर्नमेंट का लक्ष्य भारत को खेलों की दुनिया में अहम स्थान दिलाना है।
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