प्रशांत मेनन, कोच्चि लगातार 12 दिन की पूछताछ। जेल में बिताए 27 दिन। स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में सात साल का प्रतिबंध। और इसके बाद से इस टैग के साथ जीना। लेकिन एस. श्रीसंत ने कभी हार नहीं मानी। इस दौरान उन्होंने राजनीति, फिल्म, रिएलटी शो, सब जगह हाथ आजमाया लेकिन कोच्चि के इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले प्यार यानी क्रिकेट को कभी नहीं भुलाया। श्रीसंत पर पहले आजीवन प्रतिबंध लगा था जो बाद में सात साल का हो गया। उन पर लगा यह सात साल का बैन 13 सितंबर को समाप्त हो जाएगा। बीते दो महीने से उन्होंने अपने क्रिकेटिंग स्किल को निखारने के लिए इनडोर ही प्रैक्टिस शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, 'मैं सप्ताह में छह दिन 14 ओवर रोज गेंदबाजी करता हूं। मैं नई गेंद, थोड़ी पुरानी गेंद और लाल गेंद से प्रैक्टिस करता हूं। मं खुद को हर फॉर्मेट के लिए तैयार रखना चाहता हूं। जब भी क्रिकेट शुरू होगा तब पता नहीं कौन सा प्रारूप पहले खेला जाएगा इसलिए मैं हर फॉर्मेट के लिए तैयार रहना चाहता हूं।' 37 साल की उम्र में वापसी करना आसान नहीं है और श्रीसंत भी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं। वह कहते हैं, 'मैं अपना दिन योग और मेडिटेशन से शुरू करता हूं। मैंने टिम ग्रोवर (एनबीए के फिजिकल और मेंटल ट्रेनिंग कंडीशनिंग कोच) के सप्ताह में तीन बार ऑनलाइन सेशन भी अटेंड किए हैं। मैंने भारतीय टीम के पूर्व स्ट्रैंथ और कंडीशनिंग कोच रामजी श्रीनिवासन के मुझे दिए शेड्यूल को भी फॉलो कर रहा हूं। मैं प्रीहैब भी कर रहा हूं ताकि चोटों से बचा रहूं।' श्रीसंत ने माना कि इतना वक्त तक क्रिकेट से दूर रहने के बाद वह खेल के नियमों में आए कई बदलावों से वाकिफ नहीं थे। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता था कि वनडे इंटरनैशनल में अब दोनों छोर से नई गेंद इस्तेमाल की जाती है। केरल के एक साथी खिलाड़ी ने मुझे नेट्स में यह जानकारी दी तब मुझे पता चला।' दो बार वर्ल्ड कप विजेता खिलाड़ी का मानना है कि बीते रिकॉर्ड मायने नहीं रखते। और उन्हें शुरू से शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कहा, 'मेरे पास पुराने खेल का सिर्फ अनुभव है। इसके साथ मुझे यही सोचना होगा कि मैं अपना डेब्यू कर रहा हूं।'
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