नई दिल्लीविश्व चैंपियनशिप में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाले भारत के बैडमिंटन खिलाड़ी बी साई प्रणीत की नजरें सत्र के बाकी टूर्नमेंटों में प्रदर्शन में निरंतरता लाने पर टिकी हैं, जिससे कि अगले साल की शुरुआत में ही तोक्यो ओलिंपिक में जगह पक्की कर लें। पिछले हफ्ते प्रणीत पिछले 36 साल में बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बने। उन्होंने महान खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की बराबरी की, जिन्होंने 1983 में कांस्य पदक जीता था। इस प्रदर्शन से प्रणीत नवीनतम रैंकिंग में चार स्थान के फायदे से दुनिया के 15वें नंबर के खिलाड़ी बन गए हैं। एक देश के 30 अप्रैल 2020 तक शीर्ष 16 में शामिल दो खिलाड़ी ही तोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाइ करेंगे और प्रणीत ने कहा कि उनकी संभावनाएं बेहतर हुई हैं क्योंकि अब वह जब टूर्नमेंटों में हिस्सा लेंगे वहां उन्हें रैंकिंग अंक का बचाव नहीं करना होगा। प्रणीत ने कहा, ‘क्वॉलिफिकेशन समय के दौरान सिर्फ स्विस ओपन है जहां मुझे काफी अंक बचाने होंगे। पिछले साल मैं चीन और कोरिया में नहीं खेला तथा डेनमार्क और फ्रांस में जल्दी हार गया। मैं हॉन्ग कॉन्ग में भी पहले दौर में हार गया।’ उन्होंने बताया, ‘अगर मैं लगातार सेमीफाइनल और क्वॉर्टर फाइनल में जगह बनाता रहा या कोई टूर्नमेंट जीता गया जो इससे जरूरी रैंकिंग हासिल करने में मदद मिलेगी।’ हैदराबाद के 27 साल के प्रणीत ने कहा कि दो बार के विश्व चैंपियन जापान के केंटो मोमोता जैसे बड़े खिलाड़ियों को परेशान करने के लिए उन्हें अपनी फिटनेस पर काम करने की जरूरत है। बासेल में सेमीफाइनल में मोमोता के खिलाफ शिकस्त झेलने वाले प्रणीत ने कहा, ‘मुझे पता है कि अगर मैं फिट हूं तो इससे कहीं बेहतर खेल सकता हूं। पिछले कुछ टूर्नमेंट में मैं अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं और इससे मुझे आत्मविश्वास मिला। मेरे लिए फिटनेस हमेशा महत्वपूर्ण रही है और मोमोता जैसे खिलाड़ियों को हराने के लिए मुझे फिटनसे में और सुधार करना होगा।’ इस साल अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने गए प्रणीत ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप से पूर्व राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की खबर से उनका मनोबल काफी बढ़ा। उन्होंने कहा, ‘यह साल मेरे लिए अच्छा रहा और विश्व चैंपियनशिप से पहले अर्जुन पुरस्कार के बारे में पता चलने से स्वाभाविक रूप से मेरा मनोबल बढ़ा।’
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